मक्का की कीमतों में तेजी आने से किसान और पशुपालक परेशान हैं। पिछले साल जहां मक्का की कीमत 20 रुपये किलो थी, वहीं इस साल यह बढ़कर 40 रुपये किलो तक पहुंच गई है।
जुअरा, चक और ढोकसहा के किसानों का कहना है कि उत्पादन लागत बढ़ने के बावजूद उन्हें अपने अनाज का उचित दाम नहीं मिल पा रहा है। वहीं पशुपालक शिकायत कर रहे हैं कि चारा महंगा हो जाने से गाय-भैंस पालना अब घाटे का सौदा साबित हो रहा है। यदि यही स्थिति बनी रही तो दूध और उससे जुड़े अन्य उत्पादों की कीमतें भी आसमान छू सकती हैं जिससे आम उपभोक्ता पर भी सीधा असर पड़ेगा।
व्यापारियों का कहना है कि इस बार कम उत्पादन और बढ़ी हुई मांग कीमतों में उछाल का मुख्य कारण है। लगातार बारिश होने से खेती की लागत बढ़ने से उत्पादन पर असर पड़ा है। दूसरी ओर, मक्का से बने उत्पादों और पशु चारे की मांग में बढ़ोतरी हुई है।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. मनोज कुमार बताया कि इस साल शुरुआती गर्मी का प्रभाव मक्का पर पड़ा है। इसके कारण उत्पादन कम हुआ है। जिले में किसान आम तौर पर कम मक्के का उत्पादन करता है इसके कारण बाहर से मक्का आ रहा है। इससे कीमते बढ़ी हैं।