ग्राम पंचायत बिरनेर में स्ट्रीट लाइट लगाने के मामले सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप लग रहे हैं। बिजली खंभों पर पहले ग्राम पंचायत ने स्ट्रीट लगवाईं। बाद में उन्हीं खंभों पर क्षेत्र पंचायत ने टंगवा दीं। ग्रामीणों का आरोप है कि इससे कोई लाभ नहीं। पूरा खेल कमीशनबाजी का है।
ग्राम प्रधान चंद्रकली गुप्ता ने बताया कि सितंबर में ग्राम पंचायत निधि से 80 बिजली के खंभों पर 500 वाट की एलईडी लाइट लगवाई गईं थीं, जिन पर लगभग 72 हजार रुपये खर्च हुए। लाइट लगते ही गांव में रोशनी बढ़ी और लोगों ने राहत महसूस की।
ग्रामीणों के अनुसार कुछ ही समय बाद क्षेत्र पंचायत की तरफ से करीब 60 उन्हीं खंभों पर दूसरी लाइट लगा दीं गईं, जिस पर पहले से ही लगीं थीं। दोनों लाइटें एक साथ जलती हैं। इससे बिजली की खपत बढ़ रही है। ग्रामीणों को कोई अतिरिक्त लाभ नहीं मिल रहा।
ग्रामीण हिमांशु कुशवाहा, रामसुमेर, राधेश्याम, दिलीप कुमार, सजन, नरेश बाबू व पप्पू आदि ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जब पहली लाइट पूरी तरह सही हैं तो दूसरी लगाने की क्या जरूरत क्या थी। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
श्रेय लेने की होड़
क्षेत्र पंचायत की ओर से लगाई गई लाइट के नीचे ब्लॉक प्रमुख और उनके प्रतिनिधि के फोटो वाले बोर्ड टांग दिए गए। आगामी पंचायत चुनाव को लेकर ग्रामीणों में चर्चा है कि श्रेय लेने की होड़ मची है।
प्रधान ने लगवाया ही क्यों : बीडीओ
बीडीओ नेवादा संजय गुप्ता ने बताया कि ग्राम प्रधान ने क्षेत्र पंचायत की बैठक में स्ट्रीट लाइट लगाने की लिखित मांग की थी। प्रस्ताव पास होने के बाद दो महीने पहले टेंडर कराया गया। उसी के आधार पर क्षेत्र पंचायत मद से लाइट लगवाई गईं। बीडीओ के अनुसार जब ग्राम प्रधान ने आधिकारिक रूप से मांग रखी थी तो ग्राम पंचायत निधि से पहले ही खंभों पर लाइट लगवाना उचित नहीं था।