दुष्कर्म के एक संवेदनशील मामले में आरोपी युवक को नाबालिग साबित कर कानूनी राहत लेने की कोशिश आखिरकार पुलिस की गहन जांच में बेनकाब हो गई। शादी के कार्ड से लेकर स्कूल की पुरानी मार्कशीट तक की कड़ियों को जोड़ते हुए पुलिस ने उम्र में किए गए फर्जीवाड़े का खुलासा किया और पीड़िता को न्याय दिलाई।
22 सितंबर 2025 में मंझनपुर थाना क्षेत्र के एक गांव की युवती ने आरोप लगाया था कि गांव के ही युवक ने शादी का झांसा देकर करीब दो साल तक उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए और बाद में विवाह से इन्कार कर दिया। पीड़िता की मां की शिकायत पर आरोपी युवक उसके पिता, मां और दादी के खिलाफ केस दर्ज किया गया।
मामला दर्ज होने के बाद आरोपी युवक ने कोर्ट में 10वीं की मार्कशीट पेश कर खुद को नाबालिग बताया। दस्तावेज के आधार पर कोर्ट ने उसे 20 हजार रुपये के निजी मुचलके पर रिहा कर दिया।
पुलिस को आरोपी के उम्र संबंधी दस्तावेजों में विरोधाभास नजर आया तो गहन जांच शुरू की गई। जांच में सामने आया कि प्राथमिक कक्षाओं के शैक्षिक अभिलेखों में आरोपी की जन्मतिथि वर्ष 2004 दर्ज थी, जबकि 10वीं की मार्कशीट में इसे 2009 दर्शाया गया था।
पड़ताल के दौरान यह भी खुलासा हुआ कि आरोपी ने कोरोना काल के समय अपनी जन्मतिथि में बदलाव कराया था, जिसका लाभ उठाकर वह खुद को नाबालिग साबित करने की कोशिश कर रहा था।
इसके बाद पुलिस ने डीआईओएस कार्यालय के माध्यम से पूर्व कक्षाओं के मूल रिकॉर्ड का सत्यापन कराया, जिसमें जन्मतिथि 2004 ही प्रमाणित हुई। आरोपी के पिता की तरफ से कोर्ट में पेश वर्ष 2007 का कथित शादी कार्ड भी जांच में फर्जी पाया गया।
प्रिंटिंग प्रेस के नंबर पर संपर्क करने से पता चला कि कार्ड हाल ही में छपवाया गया था और उसमें दर्ज मोबाइल नंबर भी एक वर्ष पुराना था। जांच अधिकारी सीओ सदर शिवांग सिंह ने बताया कि प्रारंभिक शैक्षिक रिकॉर्ड ही जन्मतिथि निर्धारण का मान्य आधार होता है। करीब पांच महीने की जांच और 14 सुनवाई के बाद आरोपी बालिग साबित हुआ। इसके बाद 15 फरवरी को आरोपी को जेल भेजकर 20 फरवरी को चार्जशीट दाखिल कर दी गई।