कस्बे में करीब छह लाख रुपये की लागत से बनाई गई फल मंडी अब बेमतलब साबित हो रही है। फल विक्रेता मंडी में ठेला लगाने के बजाय चौराहा और बाजार में रोड किनारे अपने फल बेच रहे हैं। इससे आए दिन जाम लग जाता है और नागरिकों को आने-जाने में काफी परेशानी होती है।
कस्बे की आबादी काफी घनी है, इसलिए यहां रोज बाजार लगती है। इसके अलावा कस्बे के प्रमुख चौराहे से होकर पश्चिम शरीरा, प्रयागराज, भरवारी व मंझनपुर को मार्ग जाता है। दिन भर इस मार्ग लोग आते-जाते रहते हैं। आसपास के लगभग 25 गांव के लोग यहां प्रतिदिन बाजार करने आते हैं। कस्बे में रोज काफी भीड़ होने की वजह से मंझनपुर रोड पर वाहन पार्किंग स्थल के पास करीब छह लाख की लागत से फल मंडी बनाई गई।
इसके बाद सभी फल विक्रेताओं के ठेलों को फल मंडी के पास लगवाया गया। एक हफ्ते के बाद सभी ठेले वाले फिर चौराहा व बाजार जाने वाले मार्ग पर रोड के किनारे ठेला लगाने लगे। कुछ फल विक्रेता तो सड़क की पटरी के किनारे जमीन पर फलों का ढेर लगाकर बेच रहे हैं। इससे आये दिन जाम लग जाता है। इससे लोगों को आने-जाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
स्टैंड पर वाहन न खड़े होने से फल विक्रेताओं को परेशानी
कस्बे में फल विक्रेता लाला भाई और लालू का कहना है कि फल मंडी चौराहा से 500 मीटर दूर बनाई गई है। वहीं पास में वाहन स्टैंड है। यदि स्टैंड पर सवारी ढोने वाले वाहन खड़े हों, तो विक्रेता मंडी में ठेला लगाकर फल बेच सकते हैं। वाहन स्टैंड पर वाहन खड़ा न होने पर सवारी उतरती या चढ़ती नहीं, जिससे फल मंडी में ग्राहक नहीं आते और ठेला लगाने वाले को बिक्री में परेशानी होती है। दुकानदारों का कहना है कि यह समस्या स्टैंड पर वाहन खड़े होने से ही हल हो सकती है।
कस्बे में जल्द ही पुलिस की मदद से अभियान चलाया जाएगा। इसमें फल मंडी पर ठेले खड़े करवाए जाएंगे और वाहन स्टैंड पर वाहन व्यवस्थित रूप से खड़ा करवाए जाएंगे। यदि इसके बाद भी कोई नियम का पालन नहीं करता है, तो जुर्माना वसूला जाएगा। - शमसाद अहमद, चेयरमैन