जिले के तिरहार इलाके में शुक्रवार शाम हुई तेज बारिश और ओलावृष्टि का असर दूसरे दिन भी साफ दिखाई दिया। शनिवार को किसान अपने खेतों में पहुंचकर गिरी और खराब हुई फसलों का जायजा लेते नजर आए। तेज हवा और बड़े ओलों से किसानों की आर्थिक स्थिति पर संकट गहराने लगा है।
कई किसानों की कटाई के लिए तैयार फसल खेतों में ही गिर गई और सरसों की तो आधे से ही बालियां टूटकर खेतों में बिखर गईं। अचानक बदले मौसम ने उनकी महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया।
गेहूं की खड़ी फसल पर ओलों की मार से काफी नुकसान हुआ है। करीब 10–12 बीघा गेहूं की फसल खड़ी थी, जिसमें लगभग 15 प्रतिशत तक नुकसान हो गया है। प्रकृति की मार सीधे किसानों पर पड़ रही है। -गरीब नवाज पुष्कर मिश्रा, किसान, मेडरहा
अंदाजा भी नहीं था कि अचानक मौसम इतना खराब हो जाएगा। खेत में मिर्च तुड़वा रहा था, तभी तेज हवा के साथ बड़े-बड़े बर्फ जैसे ओले गिरने लगे। स्थिति इतनी खराब हो गई कि खेत से भागना पड़ा। ओलावृष्टि भारी नुकसान हुआ है। -दीनदयाल, किसान
प्रकृति और हालात दोनों ने किसानों को मुश्किल में डाल दिया है। पालक की खेती की थी, लेकिन ओलावृष्टि से पूरी फसल बर्बाद हो गई। अचानक आए इस मौसम ने उनकी मेहनत को खत्म कर दिया। -सुकरू लाल,किसान
करीब 20 बीघा खेती करते हैं। इसमें गेहूं और सरसों की फसल ज्यादा लगाई थी। शुक्रवार को हुई ओलावृष्टि में इन दोनों फसलों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। -उदयभान यादव,किसान, सरसावां ब्लॉक
एक बीघा अरहर की फसल बोई थी, जो पूरी तरह उसी पर निर्भर थी। ओलावृष्टि से अरहर की फसल खराब हो गई, जिससे परिवार की चिंता बढ़ गई है। परिवार पर आर्थिक संकट मंडरा रहा है। - दलजीत यादव, किसान
गेहूं, चना, सरसों और अरहर की खेती की थी। ओलावृष्टि में अधिकांश फसल प्रभावित हो गई है। प्रशासन को जल्द सर्वे कराकर नुकसान का आकलन करना चाहिए और उन्हें उचित मुआवजा दिलाया जाना चाहिए। - रवि करण सिंह, किसान
पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने की वजह से मौसम में अचानक बदलाव आया, जिससे तेज हवा, गरज-चमक के साथ बारिश और ओलावृष्टि हुई। ऐसे मौसम में पकी हुई फसलों को नुकसान होने की संभावना ज्यादा रहती है। हालांकि आने वाले दिनों में मौसम के धीरे-धीरे सामान्य होने की संभावना है। - डॉ. मनोज सिंह, मौसम वैज्ञानिक
रवि करन सिंह
रवि करन सिंह
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रवि करन सिंह
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