मंझनपुर। जनपद में मंगलवार को सुबह घने कोहरे और कड़ाके की ठंड ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया। सुबह से ही सड़कों पर कोहरे की मोटी चादर छाई रही, जिससे दृश्यता बेहद कम हो गई। राहगीरों, बाइक सवारों और वाहन चालकों को धीमी रफ्तार से सफर करने को मजबूर होना पड़ा। ठंड और गलन के चलते लोग घरों में दुबके रहे।
सुबह करीब 11 बजे धूप निकलने के बाद लोगों को कुछ राहत मिली। लोग छतों और खुले स्थानों पर धूप सेंकते नजर आए। दोपहर में खिली धूप से गलन कम हुई, हालांकि बीच-बीच में चल रही सर्द हवाओं ने ठंड का एहसास बनाए रखा। शाम ढलते ही तापमान फिर गिरने लगा और बाजारों में सन्नाटा पसर गया। मंझनपुर, चायल, सरायअकिल, भरवारी, सिराथू और चरवा क्षेत्रों में लोग अलाव के सहारे ठंड से बचते दिखे।
ठंड से राहत के लिए चाय और अलाव लोगों का सहारा बने। ग्रामीण इलाकों में कलीम की चाय की दुकान ठिठुरते लोगों के लिए अस्थायी ठिकाने जैसी बन गई है। भट्ठी पर उबलती चाय और जलते अलाव के पास मजदूर, किसान और राहगीर सुबह-शाम जुट रहे हैं। ग्रामीणों ने सार्वजनिक स्थानों पर अलाव की व्यवस्था बढ़ाने की मांग की है।
कोहरे व बर्फीली हवाओं से ठिठुरे लोग, अलाव नदारद
सिराथू। सुबह से ही घने कोहरे और बर्फीली हवाओं के चलते जनजीवन अस्त-व्यस्त रहा। लोग दिनभर घरों के भीतर या अलाव के पास बैठे रहे। सिराथू कस्बे के मंझनपुर रोड पर ठंड लगने से एक बंदर की मौत हो गई, जिसे नगर कर्मियों ने दफनाया। सुबह के समय सड़कों और बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। कई स्थानों पर अलाव की व्यवस्था न होने से लोग सड़क किनारे कूड़े के ढेर में आग जलाकर शरीर गर्म करते दिखे। ग्रामीण क्षेत्रों में अब तक अलाव और कंबल वितरण की पर्याप्त व्यवस्था न होने से लोग परेशान हैं। नगिया मई की कविता देवी ने बताया कि पात्रता के बावजूद कंबल नहीं मिला है। शमशाबाद गांव के रजनीश सोनकर ने गांव में अलाव जलाने की मांग की है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में और अधिक ठंड व कोहरे की चेतावनी दी है।
रैन बसेरों में इंतजाम बढ़े
मंझनपुर। कड़ाके की ठंड से राहत देने के लिए जिले की दो नगर पालिका परिषदों और आठ नगर पंचायतों में रैन बसेरे तैयार हैं। मुख्यालय मंझनपुर समेत भरवारी, पश्चिमशरीरा और कड़ा में भी यात्रियों व निराश्रितों के लिए गर्म बिस्तर, कंबल और अलाव की सुविधा है। हालांकि, चायल रैन बसेरा खाली पड़ा है। यहां ग्रामीण क्षेत्र के लोगों का कम आना जाना होता है। अजुहा, सिराथू और चरवा में भी रैन बसेरों में सभी व्यवस्थाएं मौजूद हैं। प्रशासन का दावा है कि जरूरत पड़ने पर इंतजाम बढ़ाए जाएंगे।
मंझनपुर में एक दुकान के सामने अलाव तापते लोग। संवाद