राष्ट्रीय पक्षी दिवस इस बार प्रकृति प्रेमियों के लिए खुशखबरी लेकर आया है। इस बार अलवारा की आर्द्रभूमि में 20 हजार से अधिक प्रवासी पक्षी पहुंचे हैं, जो जनपद का प्रमुख पर्यटन स्थल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। मेहमानों के कलरव से अलवारा वेटलैंड की रौनक बढ़ गई है।
वन विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, 22 हेक्टेयर में फैले अलवारा वेटलैंड संरक्षण क्षेत्र में पेलिकन, पेंटेड स्टॉर्क, आइबिस सहित कई प्रजातियों के पक्षी बड़ी संख्या में आए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि साइबेरिया, पूर्वी यूरोप और मध्य एशिया से हजारों किलोमीटर का सफर तय कर आने वाले ये मेहमान कौशाम्बी के सुरक्षित अलवारा वेटलैंड (आर्द्रभूमि) को पसंद कर रहे हैं।
वन विभाग का कहना है कि लाखों की संख्या में वृक्षारोपण और वेटलैंड के संरक्षण से पारिस्थितिकी तंत्र मजबूत हो रहा है। राष्ट्रीय पक्षी दिवस हमें याद दिलाता है कि पक्षी कीट नियंत्रण, परागण और बीज फैलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
जलवायु परिवर्तन और शहरीकरण के खतरे के बावजूद यह आंकड़े उम्मीद जगाते हैं। पक्षी प्रेमी राज्य पुरस्कार प्राप्त अध्यापक हरिओम सिंह बर्ड एंड नेचर प्रोटेक्शन के नाम से जागरूकता अभियान चला रहे हैं। वे प्लाईवुड से बने घरों में पक्षियों के लिए पानी और घोंसले वितरित कर रहे हैं।
दरअसल, शिकारियों पर वन विभाग की कार्रवाई से सैकड़ों पक्षियों को बचाया जा चुका है। वहीं, जनपद में राष्ट्रीय पक्षी मोर की घट रही संख्या में फिर से इजाफा देखने को मिला है।
हर्बल गार्डन किए जाएंगे विकसित : जिला योजना के तहत अलवारा वेटलैंड की सुरक्षा और पर्यटन के लिए ढाई करोड़ रुपये की लागत से कटस्टोन की पटरी, रैंप, वाच टावर का काम शुरू हो गया है। जबकि करीब नौ करोड़ रुपये की लागत से जैव विविधता पार्क बनाना शामिल है।
जिसके तहत बोटिंग नेचर ट्रेल, हर्बल गार्डन आदि विकसित किए जाएंगे, ताकि इसे इको-टूरिज्म बनाया जा सके। अभी बजट की मंजूरी का इंतजार है।