फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सरकारी भवन में शरणार्थी है ख्वचकीमई में दो कुनबा

Sun, 31 May 2015 01:53 AM IST
kaushabi
विज्ञापन
विज्ञापन
सिराथू(कौशाम्बी)। कड़ा ब्लाक के ख्वचकीमई गांव के दो गरीब परिवार बेघर होने के कारण गांव में बने सरकारी भवन में शरणार्थी बने हैं। दो साल पहले बारिश में इनके कच्चे मकान जमींदोज हो गए थे। तभी से एक परिवार पंचायत भवन और दूसरा प्राथमिक स्कूल के किचन में रह रहा है। आरोप है कि प्रधान से लेकर ब्लाक के अफसरों तक आवासीय मदद की गुहार लगाई गई, लेकिन किसी ने इनकी मदद नहीं की।
विज्ञापन


सरकारी भवन में शरणार्थी जैसा दिन गुजारनेवालों में शामिल है ख्वचकीमई गांव का राकेश कु मार विश्वकर्मा और बदलेपुर ननसेनी गांव की रामदुलारी। राकेश कुमार (40) ने बताया कि वह भूमिहीन गरीब मजदूर है। उसके पास कच्चा और छप्परनुमा घर था। दो साल पहले जोरदार बारिश में उसका घर जमींदोज हो गया था। बारिश में बेघर होने के कारण तभी से वह परिवार समेत पंचायत भवन में शरण लिए है। राकेश की मानें तो उसका नाम इंदिरा आवास की पात्रता सूची में भी है। इसके बाद भी उसे अब तक इंदिरा आवास आवंटित नहीं किया जा सका है। जबकि उसने कई बार बीडीओ और ग्राम प्रधान से इसकी मांग भी की।

 राकेश की पत्नी मनोरमा देवी बताती है कि आवासीय मदद नहीं मिलने से वह और उसके दोनों बच्चे रवि और खुशबू भी बचपन के दिन गर्दिश में काटने को मजबूर हैं। राकेश की तरह ही दूसरा बदनसीब परिवार है बदलेपुर ननसेनी गांव के रामदुलारी पत्नी स्वर्गीय गुरूप्रसाद मौर्या का। इस परिवार का भी कच्चा एवं छप्परनुमा घर दो साल पहले बारिश में गिर गया था। तभी से विधवा रामदुलारी(50) अपने  तीन बच्चे आरती (17), लवली (12) और बबलू(11) के साथ प्राथमिक विद्यालय बदलेपुर ननसेनी के किचन में शरणार्थी बनी है। इस परिवार को स्कूल के किचन में रहने के लिए भी तमाम दिक्कतें झेलनी पड़ रही है। महिला ने बताया कि बीपीएल सूची में उसका नाम होने के बाद भी सरकारी आवास नहीं मिला है। बताती है कि कई बार ब्लाक जाकर अफसरों से आवास की गुहार लगाई गई। प्रधान से भी मिन्नतें की, लेकिन किसी ने सुनवाई नहीं की। वहीं रामदुलारी बताती है कि अब तो प्रधान कमाल उद्दीन ने उसे सरकारी भवन खाली करने का अल्टीमेटम भी दे रखा है। इससे दोनों परिवार परेशान हैं। उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि सरकारी भवन से हटाए जाने पर वे बच्चों के साथ कहां जाएंगे?
विज्ञापन


बीडीओ बोले: संज्ञान में नहीं था मामला
कड़ा ब्लाक के ख्वचकीमई और बदलेपुर ननसेनी गांव के दो घरों के सरकारी भवन में पनाह लेने और उन्हें मांग के बाद भी आवासीय मदद नहीं मिलने के मामले में बीडीओ कड़ा कमलेश कुमार ऐसी किसी भी जानकारी से ही इंकार किया है। कहाकि यह प्रधान की जिम्मेदारी बनती है कि  वह ऐसी बातों को ब्लाक के जिम्मेदारों के संज्ञान में ले आए। अब पता चला है। खुद गांव जाकर हकीकत का पता करेंगे। साथ ही इन गरीब परिवारों को रहने के लिए आवासीय मदद मुहैया कराई जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें