जिला अस्पताल परिसर में करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से बना मेडिकल कॉलेज का नया अस्पताल भवन प्रशासनिक सुस्ती की भेंट चढ़ गया है। भवन तैयार है, आधुनिक मशीनें भी पहुंच चुकी हैं, लेकिन डेढ़ साल बाद भी अस्पताल का हैंडओवर नहीं हो सका है। इसके कारण हजारों मरीजों को मिलने वाली आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं शुरू नहीं हो पा रही हैं और लोग पुराने अस्पताल की भीड़ में इलाज कराने को मजबूर हैं।
मेडिकल कॉलेज से संबद्ध इस परियोजना के तहत जी-प्लस-वन (कॉरिडोर सहित), जी-प्लस-फोर और जी-प्लस-सेवन श्रेणी के भवनों का निर्माण कराया गया है। परिसर में बने दोनों प्रमुख भवनों का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और कई आधुनिक मशीनें भी अस्पताल में पहुंच चुकी हैं। इसके बावजूद संचालन शुरू न होने से मरीजों को बेहतर इलाज की सुविधा नहीं मिल पा रही है।
नया अस्पताल 330 बेड की क्षमता का होगा, जिसमें मरीजों को अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। अस्पताल में सेंट्रल स्टेरिलाइजेशन सिस्टम डिपार्टमेंट (सीएसएसडी), जन-औषधि केंद्र और कई प्रमुख विभागों की ओपीडी की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा जांच सुविधाओं में पैथोलॉजी, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी सेवाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।
अस्पताल में सात प्रकार के हाईटेक ऑपरेशन थियेटर बनाए गए हैं, जहां सामान्य से लेकर जटिल सर्जरी तक की सुविधा एक ही परिसर में मिल सकेगी। वहीं, इमरजेंसी सेवा, आईसीयू, वार्ड और अन्य सहायक कक्षों की भी बेहतर व्यवस्था की गई है।
हैंडओवर में देरी, सी-आर्म मशीन अभी डिब्बे में पैक
:: चार साल के इंतजार के बाद अस्पताल को सी-आर्म मशीन तो मिल गई, लेकिन अब तक इसका इस्तेमाल शुरू नहीं हो सका है। इस मशीन को नए अस्पताल में लगना है। लेकिन, भवन का हैंडओवर लंबित होने के कारण मशीन अभी तक डिब्बे में पैक रखी हुई है। डॉक्टरों का कहना है कि भवन का हैंडओवर होते ही मशीन इंस्टाल कर चालू करा दिया जाएगा।
ओपीडी में रोज 1500 से 1900 मरीज, बढ़ रही भीड़
:: मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों के अनुसार वर्तमान में रोजाना 1500 से 1900 मरीज ओपीडी में इलाज कराने पहुंच रहे हैं। वहीं, अस्पताल के विभिन्न वार्डों में करीब 40 से 50 मरीज हमेशा भर्ती रहते हैं। इससे अस्पताल में काफी भीड़ बनी रहती है। डॉक्टरों का कहना है कि गर्मी बढ़ने के साथ मरीजों की संख्या और बढ़ सकती है। मरीजों का कहना है कि नए अस्पताल भवन में संचालन शुरू होने पर बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और भीड़ की समस्या भी कम होगी।
नए अस्पताल में एसटीपी की व्यवस्था
:: नए अस्पताल परिसर में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की व्यवस्था भी की गई है। एसटीपी के माध्यम से अस्पताल से निकलने वाले गंदे पानी का वैज्ञानिक तरीके से शोधन किया जाएगा। शोधन के बाद पानी का उपयोग बागवानी, फ्लशिंग और अन्य कार्यों में किया जाएगा। इससे न केवल जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि परिसर को स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।
मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल का भवन पूरी तरह तैयार हो चुका है। विभागीय औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं और जल्द ही भवन का हैंडओवर हो जाएगा। इसके बाद मशीनों की स्थापना कर मरीजों को आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। डॉ. हरिओम कुमार सिंह, प्राचार्य
मेडिकल कॉलेज परिसर में बनकर तैयार नए अस्पताल का भवन। संवाद
मेडिकल कॉलेज परिसर में बनकर तैयार नए अस्पताल का भवन। संवाद