ग्रामीणों के घरों तक पानी पहुंचाने के लिए शुरू की गई स्वजल धारा योजना में करीब 54 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है। 35 गांवों में शुरू हुई इस योजना का फिलहाल नामोनिशान नहीं है, पानी की आपूर्ति तो बहुत दूर की बात रही। इससे नाराज लोगों ने धरना-प्रदर्शन भी किया था। इस खबर को 21 फरवरी को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया तो डीएम ने मामले को संज्ञान में लेते हुए प्रकरण की जांच शुरू करा दी। डीडीओ को जांच सौंपी गई है। डीडीओ के नेतृत्व में शुक्रवार को जांच टीम मंझनपुर ब्लॉक के भेलखा व सरसवां खास में परियोजना की जांच करेगी।
जिले में वर्ष 2003-04 में स्वजल धारा योजना अस्तित्व में आई। पेयजल समस्या को देखते हुए योजना के तहत सौंरई बुजुर्ग व पट्टी परवेजाबाद का चयन किया गया। शासन ने इसके लिए 11 लाख चार हजार 745 रुपये की मंजूरी देते हुए निर्माण का जिम्मा ग्राम पेयजल समिति को दिया था। लाखों की रकम मिलने के बाद चयनित गांवों में ग्राम पेयजल समिति के अध्यक्ष व सदस्यों ने जमकर मनमानी की। वर्ष 2009-10 तक योजना के अन्तर्गत जिले के 35 गांवों में पेयजल की व्यवस्था कराई गई। इस योजना के तहत गांव के सभी घरों तक पानी पहुंचाना था। पानी टंकी के साथ गांव में पाइप लाइन बिछाना था, लेकिन यह सब कागजों में हुआ। वर्ष 2009-10 में यह योजना ही बंद हो गई। नतीजतन घोटाले पर पर्दा पड़ गया। हालांकि इसके पहले इस योजना में धांधली की अफसरों ने जांच शुरू कराई थी, लेकिन योजना बंद होने के बाद अफसरों ने इस ओर से निगाह फेर ली थी।
जांच के दौरान एक प्रधान पर आरोप साबित हुआ था तो उसके खिलाफ एफआईआर भी लिखवाई गई थी। इस खबर को अमर उजाला ने 21 फरवरी के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था। खबर को डीएम अखंड प्रताप सिंह ने संज्ञान में लेते हुए डीडीओ डीके दोहरे के नेतृत्व में जांच टीम गठित करते हुए रिपोर्ट तलब की। चुनाव के चलते जांच नहीं हो पाई थी। इस पर भी डीएम ने जांच अधिकारी से एतराज जताया था। डीएम के बदले रुख को देखते हुए डीडीओ ने टीम के साथ शुक्रवार को जांच करने का आश्वासन दिया है। शुक्रवार को डीडीओ मंझनपुर के भेलखा व सरसवां गांव में इस परियोजना के तहत कितना काम हुआ है, इसकी जांच करेंगे। यदि ग्राम पंचायत में बोरिंग, जनरेटर, पेयजल टंकी और पाइन लाइन बिछी नहीं पाई गई तो तत्कालीन प्रधान, ग्राम पंचायत पेयजल समिति अध्यक्ष व ग्राम पंचायत सचिवों के खिलाफ कार्रवाई होना तय है।
दस फीसदी देना था ग्रामीणों को अंशदान
स्वजल धारा योजना बहुत सोच समझकर बनाई गई थी। इस योजना का मकसद था कि घर-घर तक पानी पहुंचाया जाए। 11 लाख चार हजार रुपये से गांवों में बोरिंग, जनरेटर व पाइप लाइन बिछाना था। इसके अलावा शेष दस फीसदी की रकम ग्रामीणों को देनी थी। शुरूआत में अंशदान को लेकर पेच फंसा था, लेकिन जब ग्रामीणों को इस योजना के बारे में पता चला तो उन्होंने अपना अंशदान भी जमा कर दिया था। इसके बाद भी यह योजना बंदरबांट का शिकार हो गई।
जांच का निर्देश मिला है। बहुत महत्वपूर्ण योजना थी। यदि इसमें धांधली हुई है तो कोई बख्शा नहीं जाएगा। फौरी जांच में ही इस योजना में क्या हुआ था, इसका खुलासा हो जाएगा।
डीके दोहरे, डीडीओ