कनैली। गांवों में बसी ग्रामीण प्रतिभाओं को निखार कर बड़े खिलाड़ी तैयार करने की मंशा कौशाम्बी ब्लाक में धड़ाम होती नजर आ रही है। दस साल पहले अठरहा गांव में बना स्टेडियम सुरक्षा और संरक्षण के अभाव में भूत बंगला बन गया है। खेल के मैदान में घास और झाड़ी खड़ी हैं। यहां बच्चों का खेलना तो दूर लोग जहरीले जंतुओं के होने की आशंका में जाने से भी परहेज करते हैं।
कौशाम्बी विकास खंड के कनैली गांव के मजरा अठरहा को वर्ष 2007-08 में तत्कालीन परिवहन मंत्री आरके चौधरी ने स्टेडियम की सौगात दी थी। यमुना किनारे बसे इस इलाके में बच्चे गली-मोहल्ले में क्रिकेट सरीखे खेल खेलते थे। जिला स्तर की दौड़ आदि प्रतियोगिता में इलाके के बच्चों ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था। उस दौरान कनैली गांव के पूर्व प्रधान टुन्नू सिंह की पुण्य तिथि पर आरके चौधरी पहुंचे थे। टुन्नू सिंह खेल को लेकर हमेशा सक्रिय रहे। इसके चलते आरके चौधरी ने गांव में खेल स्टेडियम बनवाने के लिए प्रस्ताव देने के लिए कहा।
उस दौरान प्रधान रहे अजय पटेल ने पांच बीघा जमीन अधिग्रहीत करके स्टेडियम के नाम किया। इस पर प्रदेश सरकार के खेल कूद मंत्रालय ने एक करोड़ 36 लाख रुपये स्टेडियम के निर्माण व सामग्री के लिए जारी किया। भवन और कुछ दूरी तक चहारदीवारी का निर्माण कराया गया। इसके बाद सरकार गिरने पर नई व्यवस्था ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया। आज के हालात यह हैं कि भवन खंडहर में तब्दील है और परिसर ने घास व झाड़ी उगी हैं। लोग मैदान में खेलने जाना तो दूर वहां इस लिए नहीं जाते कि जहरीले जंतु उन्हें अपना शिकार बना सकते हैं।