जिले में खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए मनरेगा योजना से 142 गांवों में खेल मैदान बनाए गए थे। यह खेल मैदान अब पूरी तरह बदहाल हो चुके हैं। इनमें बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग गई हैं। ग्राम पंचायत की लापरवाही के चलते लाखों रुपये की लागत से बने ये खेल मैदान अब खेलने लायक भी नहीं बचे।
सिराथू ब्लॉक के उदहिन और अनेठा, मंझनपुर ब्लॉक के जजौली व टेवां, कौशाम्बी ब्लॉक के जाठी समेत कुल 142 गांवों में खेल मैदान बनाने के लिए दो से पांच लाख रुपये तक की धनराशि करीब तीन साल पहले खर्च की गई। शुरुआत में इन मैदानों का उपयोग बच्चों और युवाओं ने खेल गतिविधियों के लिए किया लेकिन धीरे-धीरे इनके रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया गया।
ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारी थी कि वह इन मैदानों की देखभाल करे और समय-समय पर साफ-सफाई व मरम्मत कराते रहे लेकिन उपेक्षा के चलते मैदानों पर झाड़ियां उग आए हैं। कई जगह मैदान पर अतिक्रमण भी हो गया है। ऐसे में खेल मैदान अपनी उपयोगिता खो चुके हैं।
जाठी के सोहनलाल, मनोज व अरविंद का कहना है कि खेल मैदानों की दुर्दशा से बच्चों और युवाओं की प्रतिभा पर असर पड़ रहा है। यदि समय रहते इनके संरक्षण की व्यवस्था नहीं हुई, तो इन मैदान का फिर से अस्तित्व खत्म हो जाएगा। ग्रामीणों ने प्रशासन से मैदानों का जीर्णोद्धार कराने और नियमित रखरखाव की मांग की है।
मनरेगा योजना से केवल खेल मैदान की सफाई की योजना थी। इसके आगे का काम खेल विभाग व ग्राम पंचायत को कराना था। - मनोज वर्मा, डीसी मनरेगा।