मेडिकल कॉलेज के फिजिशियन विभाग की ओपीडी में बच्चे का इलाज करते डॉ. संजीव सिंह। संवाद
स्मार्टफोन की बढ़ती लत अब गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है। विशेषज्ञों और अभिभावकों का मानना है कि स्क्रीन के सामने अधिक समय तक रहने से बच्चे चिड़चिड़े, जिद्दी और सामाजिक रूप से अलग-थलग बन रहे हैं। इसका सीधा असर उनकी पढ़ाई, शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक व्यवहार पर पड़ रहा है।
लंबे समय तक मोबाइल फोन, वीडियो गेम और सोशल मीडिया के इस्तेमाल से बच्चों का ध्यान पढ़ाई से भटक रहा है। ऑनलाइन गेम और शॉर्ट वीडियो की लत के कारण बच्चे किताबों से दूरी बना रहे हैं, जिससे उनकी एकाग्रता और स्मरण शक्ति कमजोर हो रही है। कई स्कूलों में शिक्षकों ने बच्चों के व्यवहार में आक्रामकता और अधीरता बढ़ने की बात कही है।
मेडिकल कॉलेज के फिजिशियन डॉ. संजीव सिंह ने बताया कि अधिक स्क्रीन देखने से बच्चों की आंखों पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है। आंखों में जलन, सिरदर्द, नींद की कमी और मोटापे जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। देर रात तक मोबाइल इस्तेमाल करने से बच्चों की नींद का चक्र बिगड़ रहा है, जिससे वे दिनभर थके और चिड़चिड़े रहते हैं।
साथ ही उन्होंने कहा कि स्मार्टफोन का अत्यधिक उपयोग बच्चों के सामाजिक विकास को भी प्रभावित कर रहा है। वे दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताने के बजाय वर्चुअल दुनिया में खोए रहते हैं, जिससे संवाद कौशल कमजोर हो रहा है।
उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी है कि बच्चों के स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण रखें, उन्हें खेलकूद, किताब पढ़ने और रचनात्मक गतिविधियों की ओर प्रेरित करें। साथ ही, परिवार के साथ समय बिताने की आदत डालकर बच्चों को संतुलित और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए मार्गदर्शन देना बेहद जरूरी है।