जिले में रसोई गैस (एलपीजी) की किल्लत का असर अब छोटे कारोबारियों पर साफ दिखने लगा है। होटल, ढाबा और चाय-नाश्ते की दुकानों पर समय से गैस सिलिंडर न मिलने के कारण उनका कामकाज प्रभावित हो रहा है। मजबूरी में दुकानदार भट्ठी और कोयले का सहारा लेकर काम चला रहे हैं।
मंझनपुर, सिराथू, करारी व सरायअकिल कस्बा सहित आसपास के क्षेत्रों में छोटे व्यापारियों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। गैस की कमी के चलते कई दुकानदारों को समय पर ग्राहकों को सेवा देने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। भट्ठी पर खाना बनाना न केवल समय लेने वाला है, बल्कि इससे धुआं और प्रदूषण भी बढ़ रहा है।
पहले गैस सिलिंडर आसानी से मिल जाता था, लेकिन अब कई-कई दिन इंतजार करना पड़ता है। मजबूरी में कोयले का इस्तेमाल करना पड़ रहा है, जिससे खर्च बढ़ गया है। -राज बहादुर कुशवाहा, दुकानदार
एलपीजी की किल्लत के बाद कोयले की मांग बढ़ी है, जिससे उसके दाम भी बढ़ गए हैं। पहले 1450 रुपये प्रति कुंतल मिलने वाला कोयला अब 1650 रुपये तक पहुंच गया है।-मानचंद्र प्रजापति, दुकानदार
गैस न मिलने से काम प्रभावित हो रहा है और ग्राहकों को भी इंतजार करना पड़ता है। भट्ठी पर काम करना काफी मुश्किल होता है। -आशीष मिश्रा, दुकानदार
कोयले के दाम में करीब 200 रुपये प्रति कुंतल की बढ़ोतरी ने छोटे व्यापारियों की कमर तोड़ दी है। पहले ही मुनाफा कम था, अब लागत और बढ़ गई है। -प्रदीप मिश्र, दुकानदार
मंझनपुर ब्लॉक में भट्ठी पर नाश्ता बनाता दुकानदार। संवाद