जाड़े में भी कौशाम्बी के कई गांवों में पानी की किल्लत से लोग जूझ रहे हैं। जिले में 5 हजार से ज्यादा हैंडपम्प महीनों से खराब पड़े हैं। प्रधान और ग्रामीणों की शिकायत के बाद भी अफसर लापरवाह बने हैं। हैंडपंपों को रिबोर करने में भी मनमानी की जा रही है। शासन से 580 हैंडपम्पों के रीबोर का बजट आने पर भी अब तक सिर्फ 261 हैंडपंपों का रीबोर कराया जा सका है। समीक्षा में जलनिगम के अफसरों की मनमानी पर मंडलायुक्त ने भी फटकार लगाई है। वहीं सीडीओ ने भी पत्र भेजकर खराब पड़े हैंडपम्पों का रीबोर कराने का निर्देश दिया है। सीडीओ ने बताया कि मनमानी पर कार्रवाई की जाएगी।
दोआबा के 440 ग्राम पंचायतों में पानी की आपूर्ति के लिए जलनिगम विभाग द्वारा 22 हजार हैंडपम्प स्थापित किए गए हैं। मंझनपुर विकास खंड के ओसा गांव के रहने वाले शैलेश कुमार, रामचंद्र, अशोक कुमार, कौशाम्बी के भीखागर्ग का पुरवा के संगमलाल, महेन्द्र कुमार, राजू पाल, जाठी के विजय कुमार, सुंदरलाल, रमेश कुमार आदि का कहना है कि जलनिगम विभाग के ठेकेदार हैंडपम्प की बोरिंग में मानक की अनदेखी करते हैं। इससे लगने के बाद ही हैंडपम्पों का बोर बर्स्ट हो जाता है। पीने के पानी के लिए लोगों को भटकना पड़ता है।
खुद जलनिगम के आंकड़ों को देखें तो जिले में 5 हजार हैंडपम्प खराब पड़े हैं। प्रधान और ग्रामीणों की लगातार शिकायत पर जिलाधिकारी ने प्रस्ताव भेजकर शासन से बजट की मांग की। बताया जाता है कि इस पर 580 हैंडपम्पों के रिबोर के लिए पैसा आया था। बजट मिलने के बाद जलनिगम विभाग द्वारा सिर्फ 261 हैंडपम्पों का रीबोर कराया जा सका है। जल निगम विभाग की यह मनमानी पिछले सप्ताह मंडलायुक्त की समीक्षा में सामने आई है। पता चला कि इनमें कई हैंडपम्पों का रीबोर 3 साल से नहीं कराया जा रहा है। इससे पेयजल के लिए जिले में हाहाकार मचा है। कमिश्नर के निर्देश पर मुख्य विकास अधिकारी ने पत्र भेजकर अधिशासी अभियंता को हैंडपम्पों का रीबोर कराने और मानक के अनुसार हैंडपम्प लगवाने का निर्देश दिया है। सीडीओ बीएन मिश्रा का कहना है कि हैंडपम्पों के रीबोर में लापरवाही बरती जा रही है। एक्सईएन को तेजी से हैंडपम्पों का रीबोर कराने का निर्देश दिया गया है। लापरवाही पर कार्रवाई की जाएगी।