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Kaushambi News: मलबे में खोज रहे थे जिंदगी के निशान, अंगुलियों से हुई खोने की पहचान

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हादसे के बाद मंगलवार को सुनील की तलाश में घटनास्थल पर पहुंची उसकी पत्नी रेखा और परिवार के अन्य 
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महमूदपुर मनौरी में पटाखा गोदाम में विस्फोट के बाद लापता बूंदी कारखाने के मजदूर के माता-पिता और उसकी पत्नी दूसरे दिन मलबे में उसे खोजते रहे। पुलिस भी घटना स्थल पर छानबीन कर रही थी। बाद में पिता ने मोर्चरी में रखी पैर की मुड़ी अंगुली देखकर बेटे की पहचान की। पुलिस अब डीएनए जांच से पुष्टि करेगी।
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चरवा के पक्सराई गांव निवासी सुनील कुमार कुशवाहा (32) एक पैर से दिव्यांग था। सुनील की पत्नी रेखा कुशवाहा ने बताया कि पति की अंगुलियां मुड़ी हुई थीं। इस वजह से पहचान हो गई। वह करीब एक माह से बिहिका के धारासिंह केशरवानी के मनौरी कारखाने में साझिया के ज्ञानसिंह के साथ बूंदी बनाने का काम कर रहे थे।
सोमवार को विस्फोट में बूंदी का कारखाना जमींदोज हो गया था। रात करीब नौ बजे जेसीबी से मलबा हटाने के दौरान क्षत-विक्षत पैर मिला था। इसके बाद पुलिस ने पैर को मोर्चरी भेजकर पहचान की प्रक्रिया शुरू की। मंगलवार सुबह करीब 10 बजे पुलिस ने सुनील के परिजनों को पहचान के लिए मोर्चरी बुलाया। वहां पिता सरजू कुशवाहा ने पहचान की। सुनील के मौत की पुष्टि के बाद रेखा, बहन शोभा, भाभी राजरानी, बेटियां साक्षी व प्रियांशी और बेटे प्रियांश व शनि और बेसुध हैं।
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150 मीटर दूर खेत में मिली लोहे की कड़ाही
पटाखा फैक्टरी में विस्फोट से मिठाई कारखाने में बूंदी बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली कड़ाही करीब डेढ़ सौ मीटर दूर धान के खेत में जा गिरी। पुलिस ने तलाशी के दौरान कड़ाही के साथ बूंदी छनाई का छन्ना बरामद किया। बताया गया कि सुनील इसी कड़ाही में बूंदी बना रहा था।
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