जिले में बनकर तैयार मॉडल स्कूलों में शासन की लापरवाही के चलते शिक्षण कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है। एक भी स्कूल में स्टाफ की नियुक्ति नहीं की गई है। उधर कार्यदायी संस्था द्वारा स्कूल का भवन बनाकर शिक्षा विभाग को हैंडओवर कर दिया गया है। इसके बार स्कूल की रखवाली को लेकर माध्यमिक शिक्षा विभाग की सिरदर्दी बढ़ गई है।
शैक्षिक स्तर में सुधार लाने के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2010-11 व वर्ष 12-13 में जिले में आठ मॉडल स्कूलों को मंजूरी दी थी। इनमें चार स्कूलों को शासन ने कैंसिल कर दिया गया था। बचे हुए चार स्कूलों का निर्माण विकास खंड सरसवां के पूरब शरीरा, मंझनपुर के ओसा, सिराथू के देवखरपुर व कड़ा के केशरिया में शुरू कराया गया।
पूरबशरीरा स्कूल के निर्माण की जिम्मेदारी यूपीपीसीएल तो ओसा, देवखरपुर और केशरिया की सीएनडीएस को सौंपी गई थी। इनमें से पूरब शरीरा व देवखरपुर मॉडल स्कूलों का निर्माण कार्य पूरा करके कार्यदायी संस्था ने भवन माध्यमिक शिक्षा विभाग को हैंडओवर कर दिया। ओसा और केशरिया के स्कूल भवन अभी निर्माणाधीन हैं।
हैंडओवर किए गए स्कूल भवनों में स्टॉफ की तैनाती शासन द्वारा नहीं हो सकी। इसके चलते स्कूलों में शिक्षण कार्य शुरू नहीं हो सका। उधर मॉडल स्कूल हैंडओवर होने के बाद भवन सुरक्षा को लेकर डीआईओएस की सिरदर्दी बढ़ गई है।
मॉडल स्कूल भवन बनने के लिए केंद्र सरकार ने भले ही करोड़ों रुपए खर्च कर दिए हों पर शिक्षण कार्य का बोझ उठाने से कतरा रही है। सपा शासन काल में इन स्कूलों में स्टाफ की भर्ती के लिए विज्ञापन निकाला गया था। खर्च वहन की बात आने पर केंद्र व राज्य सरकारों ने हाथ खड़े कर लिए थे।
इस पर प्रदेश की सरकार ने चयन प्रक्रिया को निरस्त कर दिया था। इसके बाद से आज तक केंद्र व राज्य सरकार द्वारा मॉडल स्कूलोें शिक्षकों व अन्य स्टाफ की तैनाती के लिए न तो वैकेंसी निकाली गई और न ही कोई पहल की जा रही है। इससे साफ है कि चालू सत्र में इन स्कूलों में शिक्षण कार्य शुरू होने के आसार दूर-दूर तक नहीं दिख रहे हैं।
स्कूलों के भवन का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद शासन द्वारा शिक्षण कार्य कराए जाने के लिए कोई आदेश जारी नहीं किया गया। मामला शासन का है। निर्माण कार्य पूरा होने की रिपोर्ट शासन भेजी जा चुकी है। मामले में अग्रिम आदेश का इंतजार है।
अशोक कुमार सिंह, डीआईओएस