ट्रैकर डॉग प्रशिक्षक अनिल यादव के साथ पुलिस का खोजी कुत्ता लियो। पुलिस
वारदात के बाद कितनी भी सफाई से भाग निकलें, लेकिन अपराधियों की गंध उन्हें सलाखों तक पहुंचा देगी। इसी भरोसे के साथ आठ साल बाद कौशाम्बी पुलिस के डॉग स्क्वॉड में ट्रैकर डॉग लियो की एंट्री हुई है। मध्य प्रदेश के ग्वालियर टेकनपुर में विशेष प्रशिक्षण प्राप्त लियो घटनास्थल से गंध के सहारे अपराधियों तक पहुंचने में माहिर है। इससे वारदात का जल्द खुलासा हो सकेगा।
पुलिस अधीक्षक सत्यनारायण ने मंगलवार को बताया कि लियो को घटनास्थल पर मिले कपड़ों, हथियारों, पैरों के निशानों और अन्य वस्तुओं की गंध से अपराधी का पीछा करने का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। उसकी सूंघने की क्षमता सामान्य जांच में छूट जाने वाले अहम सुराग भी तलाश सकती है।
-
आठ साल बाद जिले को दोबारा मिला ट्रैकर डॉग
जिले में वर्ष 2018 के बाद पहली बार ट्रैकर डॉग की तैनाती हुई है। पुलिस ने बताया कि अब तक किसी बड़ी घटना के खुलासे के लिए प्रयागराज से डॉग स्क्वॉड बुलाना पड़ता था। लियो के आने से अब घटना का खुलासा जल्द से जल्द हो सकेगा।
-
रोजाना खर्च होंगे 425 रुपये
लियो की देखरेख के लिए प्रशिक्षित हैंडलर अनिल यादव को तैनात किया गया है। उसके लिए पुलिस लाइन में वातानुकूलित केनल बनाया गया है। विभाग प्रतिदिन 425 रुपये खर्च कर लियो को आधा किलो मांस, दो अंडे, लगभग 600 ग्राम दूध व गेहूं की दलिया या चावल देगा। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि आधुनिक तकनीक के साथ ट्रैकर डॉग की मदद से जिले में अपराधियों पर पहले से अधिक प्रभावी शिकंजा कसा जा सकेगा।