सऊदीअरब में फंसे कौशाम्बी के चार लोगों को वापस बुलाने के लिए सभी राजनीतिक दल एकजुट हो गए हैं। सांसद के बाद विधायक ने भी इसकी पहल शुरू कर दी है। इसके अलावा बसपा व कांग्रेस के नेताओं ने भी प्रशासन पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। जनप्रतिनिधियों के दबाव बनाने पर डीएम भी सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने शासन से सिफारिश की है कि वह सऊदीअरब में फंसे लोगों को वापस बुलाए।
सिराथू तहसील के टीकरडीह गांव के मक्खनलाल के साथ गांव के ही रमेश, गनेश व कादीपुर निवासी ओमप्रकाश डेढ़ महीना पहले सऊदीअरब गए थे। एजेंट की धोखाधड़ी से यह चारों लोग सऊदीअरब के हॉयल के निजम्मा में हैं। जहां इन्हें बंधक बना लिया गया है। ये सभी लोग भवन निर्माण के काम के लिए गए थे, लेकिन वहां भारतीय कामगारों के ठेकेदारों के चंगुल में फंस गए हैं। जहां इनसे हाड़तोड़ मेहनत करवाई जा रही है। वह भी बिना खाना-पानी दिए। इसकी जानकारी खुद अमर उजाला को मक्खनलाल ने व्हाट्सएप पर दी है। मक्खन के पिता लल्लू को इसकी जानकारी हुई तो वह परेशान हो गए। उन्होेंने सोमवार को डीएम अखंड प्रताप सिंह को जानकारी देने के साथ ही सांसद विनोद सोनकर, विधायक वाचस्पति को दी।
साथ ही विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को पत्र भेजकर जानकारी दी। अमर उजाला ने इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया तो सांसद के साथ विधायक वाचस्पति ने सऊदी में फंसे लोगों की मुल्क वापसी के लिए शासन स्तर के अधिकारियों से बातचीत की। इस मामले में सभी राजनीतिक दल एकजुट हो गए है। सांसद, विधायक के साथ ही बसपा व कांग्रेस के नेताओं ने भी विदेश मंत्रालय को इस मामले में पहल करने के लिए पत्र भेजा है। जनप्रतिनिधियाें के दबाव बनाने पर डीएम अखंड प्रताप सिंह ने भी इस मामले में तेजी दिखाते हुए शासन को पत्र भेजा है। साथ ही मांग की है कि परिजनों की स्थिति को देखते हुए सऊदी में फंसे लोगों को वापस बुलाया जाए।
इस मामले में पत्र लिखा गया है। आज दिल्ली में विदेश मंत्री से मिलकर उन्हें पूरे मामले में अवगत कराऊंगा।
विनोद सोनकर, सांसद
शासन को पत्र भेजा गया है। मुख्य सचिव से मांग की गई है कि वह इस संबंध में विदेश मंत्रालय से वार्ता कर सऊदी में फंसे लोगों को वापस बुलवाएं। मुख्यमंत्री को भी पत्र भेजा गया है।
वाचस्पति, सिराथू विधायक
सऊदी में फंसे लोगों को जेल भेजने की धमकी
घरों के कमाने वाले लड़के सऊदीअरब में तड़प रहे हैं। ऐसे में उनके परिजनों को कैसे नींद आएगी। वह रात भर करवटे बदलते हैं और सुबह होते ही अपना दर्द छिपाने के लिए हसिया लेकर खेतों की ओर चले जाते हैं। जहां वह बिना किसी से आंख मिलाए रोते रहते हैं। बेचैन रमेश व गनेश की मां ने तो खाना-पीना ही छोड़ दिया है।
सिराथू के टीकरडीह गांव के पूर्व प्रधान के बड़े पुत्र मक्खन लाल समेत गांव के रमेश व गनेश और पड़ोसी गांव कादीपुर का ओमप्रकाश सऊदीअरब गए हैं। शनिवार की रात मक्खन ने इसकी जानकारी अपने पिता को दी। इसके बाद से इनके घरों में सन्नाटा पसरा हुआ है। रविवार को मक्खन ने रमेश व गनेश के परिजनों को इसकी जानकारी दी। इससे वह बेचैन हो गए। इसके बाद उन्हें पता चला कि उनके बेटों को वहां खाना-पानी नहीं दिया जा रहा है। मंगलवार को मक्खन ने अमर उजाला को व्हाट्सएप के जरिए बताया कि उन्हें जेल भेजने की धमकी दी जा रही है। इसकी जानकारी होते ही परिजनों का कलेजा मुंह को निकल आया।
रिहाई के लिए की प्रार्थना
एसबी मेमोरियल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय ओसा के छात्रों ने मंगलवार को सऊदीअरब में फंसे कौशाम्बी के चार लोगों की रिहाई के लिए प्रार्थना की। इस मौके पर प्रबंधक डा. अशोक कुमार त्रिपाठी, प्रधानाध्यापक सत्यप्रकाश गुप्ता, राकेश शुक्ल, शुभम त्रिपाठी, पुष्पलता त्रिपाठी, काजल श्रीवास्तव, रीमा सिंह, हेमा रिजवी आदि रहे।
सावधानी बरतें! नहीं खाएंगे धोखा
मंझनपुर। खाड़ी देशों में सऊदीअरब ही ऐसी कंट्री है जहां सबसे ज्यादा भारतीय कामगार रोजी-रोटी के सिलसिले में जाते हैं। यही एक ऐसा देशा हैं जहां वीजा के नाम पर लोग धोखा भी खाते हैं। जाने वालों को बताया कुछ जाता है और काम उनसे कुछ लिया जाता है। ये शिकायत कौशाम्बी के लोगों की अर्से से बनी है, लेकिन इसकी जड़ में जाने का किसी ने प्रयास नहीं किया। सऊदी में कौशाम्बी के चार लोग फंसे तो इसकी अमर उजाला ने इसकी गहराई से पड़ताल की हकीकत यही सामने आई कि यदि जाने से पहले सावधानी बरतें तो आपके साथ धोखा हो ही नहीं सकता। यदि ऐसी नौबत आ जाती है तो आपके वापस आने के तमाम रास्ते भी हैं वह भी मुआवजे के साथ।
सऊदीअरब में कौशाम्बी के चार लोग फंस गए हैं। इसकी जानकारी सऊदीअरब में रह रहे कौशाम्बी के अधिकांश लोगों को हो चुकी है। सऊदीअरब में अर्से से रह रहे लोगों से इस संबंध में बातचीत की गई तो उन्होंने इस मसले पर उन्होंने अपनी बेबाक राय भी रखी। सऊदीअरब में करीब दस साल से करारी के महफूज अहमद आर्किटेक्ट हैं। इनके पिता वहां 30 साल से यही काम कर रहे हैं। सऊदीअरब के कई शहरों में उनका यह काम चलता है। महफूज ने बताया कि एजेंट यहां के लोगों की जल्दबाजी का फायदा उठाते हैं और सऊदी भेज देते हैं। महफूज का कहना है कि सऊदीअरब हो अथवा अन्य किसी खाड़ी देश जाना हो। जाने से पहले लोग यह देखें कि उनको वीजा किस काम का मिला है।
कहां कि सऊदीअरब का वीजा अरबी भाषा में लिखा होता है। उनकी सलाह यह है कि लोग पहले अपने परिचित अथवा भारतीय दूतावास से इस बात की तस्दीक करें कि वह जिस काम के लिए जा रहे हैं, उसी के लिए उनको वीजा मिला है या नहीं। भारतीय दूतावास इस काम में उनकी भरपूर मदद करेगा। इसके बाद भी यदि उनको कम्प्यूटर आपरेटर का वीजा मिला है और सऊदी पहुंच गए। कपिल वहां उनसे दूसरा काम करने को कहता है तो वह कत्तई काम न करें। न ही उसे अपना पासपोर्ट दें और सीधे इसकी शिकायत सऊदीअरब में स्थित भारतीय दूतावास से करें।
उनके वीजा की जांच होगी। इसके बाद इस संबंध में वहां की सरकार से भारतीय अधिकारी बातचीत करेंगे। यदि कपिल उनको काम नहीं देता है तो इसके बदले उसको मुआवजा देना पड़ेगा। साथ ही जितने दिन वह वहां रहेंगे, उसका प्रतिदिन का हर्जाना अलग से देना होगा। सऊदीअरब से वापस आए मो. हसीब का भी यही कहना है। मो. हसीब का कहना है कि वहां की सरकार वीजा पर ही काम देती है। यहां के लोकल एजेंट ही लोगों से धोखाधड़ी करते हैं। यदि लोग वीजा की प्रक्रिया से नहीं वाकिफ हैं तो इसकी वह पहले जांच कराए, तभी वहां जाएं। जांच के बाद वहां जाएंगे तो उनका कोई नुकसान नहीं होता है।