सऊदीअरब में फंसे कौशाम्बी के चार युवकाें को अभी तक राहत नहीं मिली है। लगभग एक माह से वह वहां फंसे हैं। युवकों के सामने खाने-पीने का संकट है। युवकों के परिजन यहां उनकी चिंता में बेहाल हैं। वह अपनों का घर लौटने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। वहीं केंद्र सरकार से कोई मदद न मिलने पर परिजन नाराजगी जता रहे हैं।
सऊदीअरब में सिराथू तहसील के टीकरडीह गांव निवासी मक्खनलाल, रमेश, गनेश व कादीपुर निवासी ओमप्रकाश करीब दो माह पहले सऊदीअरब गए थे। इन्हें सिराथू के कुरामूरीदन निवासी शमीम ने भेजा था। इसके लिए शमीम ने मोटी रकम भी ली थी। ये युवक सऊदीअरब के हॉयल में थे। वहां इनका कपिल ने पासपोर्ट छीन लिया था और हाड़तोड़ काम करवाना शुरू कर दिया। विरोध करने पर इनको बंधक बना लिया गया। इसके बाद खाना-पीना भी देना बंद कर दिया गया था।
इसकी जानकारी मक्खन ने अपने परिजनों को दी थी, इसके बाद इनके घर में सन्नाटा पसर गया था। मक्खन के पिता लल्लू ने एजेंट के खिलाफ शिकायत की थी। भाजपा के सांसद विनोद सोनकर ने इस मामले में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से बातचीत कर कार्रवाई कराने का आश्वासन भी दिया था। इसके बावजूद 20 दिन से अधिक का समय बीत गया, लेकिन अभी तक विदेश में फंसे युवकों को बुलाने की कोई पहल नहीं हो सकी। मक्खन के पिता लल्लू ने बताया कि शुक्रवार को सऊदीअरब से फोन आया था। मक्खन ने बताया था कि शमीम का भाई वहां सऊदीअरब में रहता है। उसने हम लोगों को राजधानी रियाद बुलवाया है। कहा कि कोर्ट की मदद से अपना पासपोर्ट हासिल कर लिया है। लल्लू ने बताया कि बेटे व उसके साथियों के सामने खाने-पीने का संकट है। कहा कि परिजन रात-दिन उनकी याद में चिंतित रहते हैं।
एजेंट के खिलाफ नहीं हुई कार्रवाई
मक्खन के पिता लल्लू ने एजेंट शमीम के खिलाफ डीएम व एसपी को शिकायती पत्र दिया था। मामले में अधिकारियों ने सैनी कोतवाली पुलिस को कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। सिराथू चौकी पुलिस को मामले की जांच मिली है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। लल्लू ने बताया कि तीन दिन पहले चौकी प्रभारी ने फोन कर बुलाया था। साथ ही वह यह पूछ रहे थे कि इसमें करना क्या है। लल्लू का कहना है कि अब वह दरोगा से मिलेगा और कार्रवाई कराने की मांग करेगा।