भरवारी। चरवा स्थित बरम बाबा देव स्थान पर आयोजित श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ महोत्सव में रविवार को कथा व्यास स्वामी राजेंद्र दास देवाचार्य महराज ने श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह का वर्णन किया। बताया कि सत्संग करने अथवा सुनने से मनुष्य के विचार, बुद्धि, कर्म और आचरण बदल जाते हैं।
कहा कि जब तक कर्मों की पूंजी है, इसका सुख भोग लो। मृत्युलोक और मानुष तन देवों से भी श्रेष्ठ है। इस चोले को पाने के लिए देवता भी तरसते हैं। कहा कि सत्संग से मति, कीर्ति, भलाई और गति मिलती है। सत्संग को जो तन और मन लगाकर सुनते हैं, उनका पूरा जीवन बदल जाता है। सत्संग में आने से विचार, बुद्धि, कर्म और आचरण बदलता है। धीरे-धीरे सत्संग से पूरा जीवन बदल जाता है।
श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह की कथा के दौरान सुंदर झांकी निकाली गई। श्रीकृष्ण-रुक्मिणी का वेश धारण किए बाल कलाकारों पर श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा किया। कथा में आयोजक धनंजय दास महराज, कथा वाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज, बाहुबली पीठाधीश्वर महाराज आदि उपस्थित रहे।