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मझधार में फंसी समेनाज की जिंदगी, पुलिस व शरीयत भी नहीं दे सका इंसाफ

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Samanaz's life stuck in the mind, police and Sharia also could not give justice
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करारी। तीन तलाक को लेकर सजा व जुर्माने का प्राविधान निश्चित होने के बाद भी तमाम महिलाएं इसका शिकार होकर दर-बदर की ठोकरें खा रही हैं। करारी कस्बे के किंगनगर मोहल्ले में रहने वाली समेनाज भी उन्हीं में से एक हैं।
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समेनाज ने शनिवार को पुलिस को दी गई तहरीर में बताया कि 16 जून 2019 को उसकी शादी मोहल्ले के सफीक पुत्र अब्दुल सत्तार के साथ हुई। शादी में मायके वालों ने हैसियत के मुताबिक दान-दहेज दिया। 20 सितंबर को उसका पति रोजगार के सिससिले में सऊदी चला गया। पति के सऊदी जाने के बाद घर में सास, देवर, ननद व जेठ 50 हजार रुपये नकद व सोने की मांग के साथ समेनाज को प्रताड़ित करने लगे। यह बात समेनाज ने अपने पति को फोन पर बताई तो उसने घरवालों से बात की। इसके बाद सफीक भी परिवार वालों का समर्थन करने लगा। तीन महीने पहले उसने फोन पर समेनाज को फोन पर तीन तलाक दे दिया। इसके बाद ससुराल वालों ने समेनाज को घर से निकाल दिया।
मायके पक्ष के लोगों ने ससुराल वालों से कई बार बात कर बेटी को अपनाने के लिए मान-मनौव्वल किया, लेकिन बात नहीं बनी।
शनिवार को समेनाज ने करारी थाने में पति सहित ससुरालियों के खिलाफ लिखित तहरीर दी। इस बाबत इंस्पेक्टर अशोक कुमार का कहना है कि तीन तलाक का मामला नहीं है। शुरुआती जांच में पता चला है कि महिला ससुराल जाने को राजी नहीं है। तीन तलाक के बात पुष्टि हो जाने पर रिपोर्ट दर्जकर कार्रवाई की जाएगी।
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क्या कहते हैं कानून के जानकार
मंझनपुर। जिला अदालत में क्रिमिनल मामलों की पैरवी करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता पीसी चौरसिया का कहना है कि तीन तलाक मान्य नहीं है। ऐसे मामलों में आरोपी को पांच साल की सजा व एक लाख रुपये जुर्माने का प्राविधान है। अगर, तीन तलाक फोन पर दिया गया है तो आरोपी के खिलाफ आईटी एक्ट की धारा 65 व तलाक निरोधक कानून के तहत रिपोर्ट दर्ज करा कर आरोपी को सजा दिलाई जा सकती है।
मौलाना बोले...शरीयत में ये है नियम
मंझनपुर। तलाक के मामलों के बाबत मदरसा जामिया इमदादुल उलूम करारी के प्रधानाचार्य मौलाना मो. इमरान का कहना है कि तलाक देना ही नहीं चाहिए। बताया कि शरीयत में कहा गया है कि अगर पति व पत्नी साथ रहने को राजी नहीं हैं तो एक प्रक्रिया के तहत दोनों अलग हो सकते हैं। यदि शौहर और बीवी दोनों अचानक या किसी बात से अलग होना चाहते हैं तो प्रक्रिया के तहत पहले एक तलाक दिया जाता है। इसके बाद दोनों पक्ष के लोग आपस में बैठकर सुलह कर सकते हैं। बात नहीं बनने पर छह महीने बाद दूसरा तलाक दिया जाता है। इसके बाद दोनों पक्ष के रिश्तेदारों के पास आपस में पंचायत कर सुलह कराने का अवसर होता है। इसके बाद भी पति व पत्नी साथ रहने को राजी नहीं होते हैं तो छह महीने बाद तीसरा तलाक दिया जाता है। एक साथ तीन तलाक देना गैर कानूनी है।
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