ओवरलोड वाहनों से क्षतिग्रस्त हो रहीं सड़कें
एआरटीओ और खनन विभाग की कार्रवाई से बचने के लिए नंबर प्लेट पर कालिख पोत देते हैं वाहन चालक
संवाद न्यूज एजेंसी
मंझनपुर। शासन-प्रशासन की सख्ती के बावजूद ओवरलोडिंग का खेल जारी है। वाहनों के नंबर प्लेट पर चालक कालिख पोतकर नंबर छिपा कर खनिज ढो रहे हैं। इससे सड़कें भी क्षतिग्रस्त हो रही हैं।
दोआबा के आधा दर्जन यमुना घाटों से बालू, चित्रकूट व फतेहपुर में गिट्टी-बालू का खनन हो रहा है। तीनों जनपदों से रोजाना करीब छह सौ खनिज लदे वाहन जिले की सड़कों पर चलते हैं। सुबह तीन से पांच बजे के बीच बड़ी संख्या में ओवरलोड ट्रक व डंपर यमुना घाटों को जोड़ने वाली सड़कों फर्राटा भर हैं। एआरटीओ और खनन विभाग के ऑनलाइन चालान से बचने के लिए कई चालक ट्रक व डंपर की नंबर प्लेट पर मिट्टी व कालिख लगा देते हैं। इससे रजिस्ट्रेशन नंबर छिप जाते हैं और चालान से बच जाते हैं। तमाम वाहन ऐेसे भी नजर आते हैं जिनमें नंबर प्लेट ही नहीं होती। जबकि वाहन में रजिस्ट्रेशन नंबर का अस्पष्ट होना भी यातायात नियमों का उल्लंघन है। बीते दिनों सिराथू में गुरुकुल रोड पर ऐसा ही कुछ नजारा देखने को मिला।
-------------
सड़कों पर दोगुना भार लेकर चल रहे वाहन
मंझनपुर। आमतौर पर पीडब्ल्यूडी द्वारा बनाई जाने वाली सड़कों की भार क्षमता 20 से 25 टन होती है। गांव के संपर्क मार्ग की क्षमता मात्र पांच से सात टन होती है, लेकिन ग्रामीण सड़कों से लेकर राष्ट्रीय राजमार्ग पर रात-दिन सैकड़ों दौड़ रहे छह चक्का से 22 चक्का तक के ओवरलोड बालू और गिट्टी भरे ट्रकों का लोड 40 से 45 टन तक है। यानी सड़कों की क्षमता से दो गुना ज्यादा भार ढोया जा रहा है। छह चक्का ट्रक में 15 टन, 10 चक्का में 25 टन, 12 चक्का में 31 टन और 20 चक्का में 40 से 45 टन तक खनिज लादा जाता है।
--------
इनका कहना है
ओवरलोडिंग पर शिकंजा कसने के लिए अक्सर अभियान चलाकर कार्रवाई की जाती हैं। नंबर प्लेट पर मिट्टी-कालिख पोते मिले वाहनों में चेसिस नंबर के आधार पर ई-चालान किया जा रहा है। ओवरलोडिंग पर रोकथाम के लिए अभियान में और तेजी लाई जाएगी।
शंकर जी सिंह-एआरटीओ