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बिजली ने बिगाड़ा खरीफ की खेती का खेल

Mon, 25 Jul 2016 12:34 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
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दोआबा में बिजली ने खरीफ की प्रमुख फसल धान की रोपाई का खेल बिगाड़ दिया है। लो वोल्टेज के चलते नलकूप पानी नहीं उगल रहे हैं। इसके चलते मौसम भले ही रोपाई के लिए अनुकूल है पर पानी के अभाव में किसान बेबस दिख रहे है। जिम्मेदार हैं कि लो वोल्टेज की समस्या को लेकर चुप्पी साधे हुए है।
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खरीफ की खेती में दोआबा के किसानों की प्रमुख फसल धान है। किसान अपने खेतों के 80 फीसदी हिस्से में धान की रोपाई करते हैं। बांकी के हिस्से में तिल, उड़द, अरहर और बाजरा की खेती की जाती है। मौजूदा समय में धान की रोपाई चरम पर है। इस साल ऐन वक्त पर बिजली किसानों को दगा दे रही है। एक सप्ताह से हालात ऐसे हो गए हैं कि लो वोल्टेज से नलकूप चलना तो दूर घरेलू उपभोक्ताओं के उपकरण भी काम नहीं कर रहे है। नलकूपों के पानी न उगलने से किसानों के सामने विकराल समस्या खड़ी हो गई है।

धान की रोपाई के लिए वह खेतों में पानी नहीं भर पा रहे हैं। किसानों की माने तो नलकूप की बटन जैसे ही ऑन की जाती है लो वोल्टेज के चक्कर में अजीब सी आवाज आने लगती है। इसके बावजूद यदि किसान नलकूप चालू रखते हैं तो उनकी मोटर भी जल सकती है। इसके चलते अधिकतर किसान अपने नलकूप ठप रखते हैं। नलकूपों के ठप होने से धान की रोपाई पूरी तरह से बाधित हो गई है। ऐसा नहीं है कि मामले की शिकायत नलकूप और घरेलू उपभोक्ताओं ने संबंधित जेई और एसडीओ से नहीं की। लेकिन कोई भी इस बावत न तो सही जवाब दे रहा है और न ही लो वोल्टेज में कोई सुधार ही किया जा रहा है।
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24 घंटे में एक बीघा खेत भरना मुश्किल
 खरीफ के खेती के समय बिजली के दगा देने से किसानों का हाल बेहाल है। रोपाई का समय निकल न जाए इसे देखते हुए कुछ नलकूप स्वामी अपने खेतों में पानी भरने के लिए लो वोल्टेज में जोखिम लेने से भी नहीं कतरा रहे। वह अपने खेतों में पानी भरने के लिए नलकूप को चलाते हैं लेकिन इसका कोई खास फायदा उन्हें नहीं हो रहा। खुद के नलकूप से किसान 24 घंटे में मिलने वाली 12 घंटे बिजली से एक बीघा खेत में भी पानी नहीं भर पाता। ऐसे में नलकूप के अगल-बगल स्थित दूसरे किसानों के खेतों में धान की रोपाई कैसे हो पाएगी अंदाजा लगाया जा सकता है।

25 दिन से कार्यालय से गायब हैं एक्सईएन
 पटरी से उतर चुकी विद्युत व्यवस्था से जिले भर के उपभोक्ता हलाकान हैं। महकमे के जिम्मेदार के गायब रहने से उपभोक्ता शिकायत भी नहीं कर पा रहे हैं। उपकेंद्र में तैनात जेई और इलाकाई एसडीओ हैं कि वह सुनने का नाम ही नहीं ले रहे हैं। एक्सईएन एके गौतम के कार्यालय न आने से जेई, एसडीओ तो मनमानी कर ही रहे है लाइनमैन तक निरंकुश हो चुके हैं। जिसका खामियाजा लगातार जिले के उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि उपभोक्ता अपनी शिकायत करे तो किससे। उधर 25 दिन से जिले से गायब चल रहे एक्सईएन कब लौटेंगे इस बावत कोई जानकारी देने वाला नहीं है।

खेतों में अरहर, ज्वार, बाजरा छीटने में जुटे किसान
दोआबा में सप्ताह भर से चल रही लो वोल्टेज की समस्या से नलकूप पानी नहीं उगल रहे हैं। इससे किसानों के खेत सूखे पड़े हैं। धान रोपाई के लिए पानी न मिलने और खरीफ की खेती का समय खत्म होता देख किसान अब अपने खेतों में अरहर, तिल, ज्वार, बाजरा आदि की छिटाई करने लगे हैं। किसानों को भय है कि यदि वह बिजली के इंतजार में बैठे रहे तो उनके खेत बंजर पड़े रह जाएंगे।
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एक्सईएन का स्थानांतरण हो चुका है। दूसरे एक्सईएन की तैनाती की गई है। एक-दो दिन में वह चार्ज ले लेंगे। बिजली की जो भी समस्या होगी उसे ठीक कराएंगे।
एससी झा, मुख्य अभियंता विद्युत
इलाहाबाद मंडल
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