मंझनपुर (ब्यूरो)। डेढ़ साल से निलंबित चल रही सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान के आवंटन को लेकर टांडा गांव में दो पक्षों के बीच तनातनी बनी हुई है। मंगलवार को एक पक्ष ने वीडीओ, एडीओ पर रुपये लेकर खुली बैठक नहीं कराने का आरोप लगाते हुए कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। साथ ही शिकायत डीएम से की। लोगों ने डीएम से ग्रामसभा की खुली बैठक कराकर दुकान बहाली अथवा नई दुकान के आवंटन की मांग की है।
कड़ा ब्लाक के टांडा गांव की निर्मला देवी, शैलेंद्र कुमार, रामनरेश, ओमप्रकाश, रामकली, पुष्पा, सतीश कुमार आदि ने डीएम को दिए गए शिकायती पत्र में बताया कि उनके गांव का कोटा 28 मार्च 2014 से निलंबित चल रहा है। खाद्यान्न की दुकान को गांव से 8 किलो मीटर दूर संबद्ध कर दिया गया है। इसकी वजह से ग्रामीणों को राशन और मिट्टी का तेल लेने जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। गांव के लोगों का आरोप है कि वीडीओ और एडीओ पंचायत रुपये लेकर अपने चहेते के नाम दुकान का आवंटन कराना चाहते हैं। बताया कि शिकायत पर एसडीएम के निर्देश पर बीडीओ कड़ा ने दुकान का आवंटन करने के लिए खुली बैठक की तारीख एक फरवरी 2015 रखी थी। आरोप है कि कागजी कोरम पूरा करनेे के बाद वीडीओ ने बैठक स्थगित कर दी।
इसके बाद दूसरी बैठक 16 फरवरी को बुलाई गई। इस बैठक में जमकर हंगामा हुआ। भारी हंगामे के बाद शांती देवी 295 मत पाकर विजयी हुईं। आरोप है कि चहेते का चयन नहीं होने की वजह से वीडीओ, एडीओ ने कार्रवाई रजिस्टर में खुद को बंधक बनाकर प्रस्ताव बनाए जाने की बात लिखकर इस बार की बैठक में हुआ प्रस्ताव भी निरस्त करा दिया। तीसरी बार 20 मई को गांव में खुली बैठक होनी थी। ग्रामीणों ने बताया कि इस बैठक में वीडीओ, एडीओ पहुंचे ही नहीं। इस कारण से बैठक नहीं हो पाई। इससे परेशान ग्रामीणों ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। डीएम ने कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद गांव के लोगों का गुस्सा शांत हुआ।