जिले के ढाई लाख गरीबों को अब कोटे की दुकानों से चीनी नहीं मिलेगी। अब इन्हें चाय आदि के लिए चीनी महंगे दर पर दुकान से खरीदनी पड़ेगी। शासन ने कोटे की दुकानों को दी जाने वाली चीनी पर ब्रेक लगा दिया है। शासन का यह नियम अप्रैल माह से जिले भर की सभी राशन की दुकानों में लागू हो जाएगा। इसके लिए जिला पूर्ति अधिकारी ने भी निर्देश जारी कर दिया है।
जिले की 498 ग्राम सभाओं में अंत्योदय व पात्र गृहस्थी के दो लाख 62 हजार कार्ड हैं। इन गरीबों को कोटे की दुकानों से हर माह राशन के साथ मुंह मीठा करने के लिए चीनी भी मुहैया कराई जाती थी। अन्त्योदय कार्ड धारकों को दो किलो तो पात्र गृहस्थी के प्रत्येक कार्ड पर साढ़े आठ सौ ग्राम चीनी हर माह कोटेदार देता था। लेकिन अब गरीबों को मुंह मीठा करने के लिए गैर सब्सिडी वाली चीनी बाजार से खरीदना होगा। कोटे की दुकानों को शासन द्वारा दी जा रही सब्सिडी वाली चीनी का वितरण बंद कर दिया गया है। शासन का नया फरमान मिलते ही जिला पूर्ति अधिकारी आनंद सिंह ने सभी कोटेदारों को इसकी जानकारी दे दी है। कोटे में चीनी का आवंटन बंद करना गरीबों पर भारी पड़ रहा है। इसके पहले केंद्र सरकार की ओर से मिट्टी केे तेल की मात्रा भी घटा दी गई थी।
दुकानों में महंगी हो सकती है चीनी
केंद्र सरकार के सब्सिडी न देने पर राज्य सरकार ने सरकारी राशन वितरण की दुकानों से चीनी बिक्री पर रोक लगा दी है। अब गोदाम से चीनी का उठान ही नहीं होगा। ग्राहकों को कोटे से चीनी न मिलने पर उन्हें दुकानों से खरीदनी पड़ेगी। ऐसे में दुकानों में चीनी के दाम अचानक बढ़ भी सकते हैं।
नहीं पता क्यों बंद हुई चीनी
जिला पूर्ति अधिकारी आनन्द सिंह का सिर्फ इतना कहना है कि अप्रैल माह से अब चीनी का उठान नहीं होगा और न ही कोटे की दुकान से चीनी का वितरण होगा। ऐसा क्यों हो रहा है, इसकी जानकारी होने से खुद इंकार कर दिया। उनका यही कहना है कि शासन का निर्देश आया है, जिसे उन्हें जनपद में लागू करा दिया है।