कौशांबी ब्लॉक के बाबा का पुरवा मजरा गोपसहसा स्थित कुटी पर सवा सौ साल से रामलीला का मंचन हो रहा है। समय-समय पर रामलीला के कलाकार तो बदले पर किरदार की भूमिका पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। एक अक्तूबर से शुरू होने वाली ऐतिहासिक रामलीला के मंचन के लिए एमपी से आए कलाकारों ने डेरा डाल दिया है।
बेरौंचा निवासी कृष्ण देव तिवारी के पूर्वज गनेश प्रसाद तिवारी ने 24 गांवों में बसे परिवार के लोगों की मदद से बाबा का पुरवा गांव में राम-जानकी कुटी का निर्माण 1765 में कराया था। जमींदारी प्रथा के दौरान कुटी के नाम से तिवारी परिवार के लोगों ने सौ बीघा जमीन दान की थी। वर्ष 1895 में गणेश प्रसाद तिवारी और कृष्ण देव के पिता त्रियुगी नारायण ने सौ बीघा भूमि से होने वाली आय से रामलीला का मंचन शुरू कराया। रामलीला का मंचन मध्य प्रदेश रींवा के बरेटी से आने वाले 18 कलाकारों द्वारा किया जा रहा था।
सवा सौ साल पुरानी रामलीला का 121 वां मंचन एक अक्तूबर से कुटी में शुरू होगा। इसके लिए मध्य प्रदेश से आए कलाकारों ने कुटी में डेरा डालकर रिहर्सल शुरू कर दिया है। सवा सौ साल पुरानी रामलीला के कई किरदार निभाने वाले समय की चादर ओढ़ चुके हैं, लेकिन नए कलाकारों से किरदार पर इसका कुछ खास असर नहीं पड़ा। मौजूदा समय में रामलीला की देखरेख ग्राम प्रधान रिंकी द्विवेदी द्वारा की जाएगी।
चौथे महंत के रूप में देखभाल कर रहे जयरामदास
बाबा का पूरा गांव में तिवारी परिवार द्वारा 1765 में बनवाई गई कुटी की देखभाल इन दिनों चौथे महंत के रूप में जयराम दास कर रहे हैं। इनसे पहले क्रमश: कुटी के महंत मंगलदास, जगन्नाथ दास और रामसेवक दास रहे हैं। कुटी में स्थापित भगवान राम-जानकी की पूजा लगातार इन महंतों द्वारा होती रही है। स्थानीय लोगों की कुटी के प्रति भारी आस्था है। नवरात्र के मौके पर इलाकाई लोगों की भारी भीड़ कुटी में उमड़ती है तो रात को रामलीला का मंचन देखने के लिए दर्जनभर गांवों से दर्शक आते हैं।