बारिश से जवाहरगंज में गिरी धान की फसल। संवाद
दो दिन से हो रही बेमौसम बारिश ने खरीफ की फसलों धान, तिल, उड़द, बाजरा और आलू को भारी नुकसान पहुंचाया है। खेतों में जलभराव और तेज हवाओं के कारण समय से लगाए गए और कम अवधि की धान की बालियां जमीन पर गिर गई हैं, जिससे कटाई में भारी मुश्किल हो रही है। जलभराव से धान के उत्पादन और गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
चायल तहसील के चिल्ला शहबाजी गांव निवासी अजय कुमार, दयाराम और चौराडीह निवासी जितेंद्र ने बताया कि खरीफ सीजन में धान की खेती बड़े पैमाने पर हेाती है। अधिकतर किसानों ने तिल, उड़द, बाजरा, सफेद कद्दू और मिर्च की खेती की है। इसके आलावा अगेती आलू की बुआई चल रही है।
बेमौसम हो रही बारिश से कम अवधि वाली तैयार धान की फसल गिर गई। कई खेतों में जल भराव से बालियां पानी में डूब गई गई। ऐसे में फसल की कटाई में परेशानी होगी। वहीं, उत्पादन और गुणवत्ता में भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। कृषि विज्ञान केंद्र के मृदा वौज्ञानिक डाॅ. मनोज कुमार सिंह ने किसानों को सलाह दी है कि वे खेतों से जल निकासी के लिए तत्काल उपाय करें। नालियों के जरिये खेत से जल निकासी करें। पानी निकालने के लिए पंप का उपयोग करें। सोमवार तक मौसम खराब रहने की संभावना है जिससे स्थिति और गंभीर हो सकती है।
बारिश में बर्बाद हुई धान की फसल
सप्ताह भर से रुक-रुक कर हो रही बारिश से धान सहित तिलहन की 58 फीसदी फसलों को नुकसान हुआ है। ऐसे में किसानों ने सरकार से मुआवजा की मांग की है। तहसील के 100 से अधिक किसानों की एक हजार से अधिक बीघे धान फसल खेत में गिरकर कर बर्बाद हो गई है। किसान नेता अजय सोनी ने बताया कि बारिश से किसानों का आर्थिक नुकसान हुआ है। उन्होंने नुकसान का आकलन कर प्रशासन से मुआवजा देने की मांग की है। यदि ऐसा नहीं होता तो किसानों के साथ जिला मुख्यालय में धरना प्रदर्शन किया जाएगा।