कादीपुर स्थित मेडिकल कॉलेज। संवाद
मंझनपुर। मेडिकल कॉलेज में सामने आए रैगिंग प्रकरण की जांच का अब दायरा बढ़ने लगा है। पहली जांच में पूरे सीनियर बैच को
निलंबित किए जाने के बाद अब कॉलेज प्रशासन ने मुख्य दोषियों की पहचान के लिए एक विशेष टीम गठित की है। प्रशासन का कहना है कि आगे की कार्रवाई सिर्फ उन्हीं छात्रों पर होगी जो वास्तव में दोषी पाए जाएंगे। अन्य सभी बहाल कर दिए जाएंगे।
मेडिकल कॉलेज में रैगिंग प्रकरण की 30 नवंबर को एंटी-रैगिंग हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायत के बाद 13 सदस्यीय जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में नियमों के अनुसार सामूहिक कार्रवाई की थी, जिसके आधार पर सीनियर बैच के 97 छात्र-छात्राओं को निलंबित कर दिया गया था। रैगिंग पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में की गई इस कार्रवाई के बाद कॉलेज प्रशासन पर लापरवाही और जल्दबाजी के आरोप भी लगे। अब प्राचार्य डॉ. हरिओम कुमार सिंह ने प्रकरण की गहराई से जांच करने के लिए पांच सदस्यीय विशेष जांच टीम का गठन किया है। टीम का नेतृत्व उप-प्रधानाचार्य डॉ. सौरभ कृष्ण मिश्र को सौंपा गया है, जबकि अन्य सदस्यों की पहचान गोपनीय रखी गई है, ताकि जांच पर किसी भी तरह का दबाव न पड़े। विशेष टीम ने बैच के सभी छात्रों के बयान, हॉस्टल फुटेज, रूम विजिट रिपोर्ट और फ्रेशर्स पार्टी से संबंधित बातचीत सहित कई बिंदुओं की जांच शुरू कर दी है। टीम को एक सप्ताह में अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। कॉलेज प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि दोषी छात्रों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जबकि निर्दोष छात्रों को किसी भी प्रकार की सजा नहीं दी जाएगी।
मेडिकल कॉलेज की एंटी रैगिंग टीम और होगी सक्रिय
- मेडिकल कॉलेज में सामने आए रैगिंग प्रकरण के बाद प्रशासन ने एंटी रैगिंग टीम को और मजबूत करने का निर्णय लिया है। प्राचार्य डॉ. हरिओम कुमार सिंह ने बताया कि हाल में हुई घटना गंभीर है, इसलिए ऐसी किसी भी गतिविधि की तत्काल जानकारी मिलना आवश्यक है। उन्होंने, कहा कि एंटी रैगिंग टीम को अब और अधिक सक्रिय और सतर्क किया जाएगा। साथ ही टीम में कुछ छात्रों को भी गोपनीय रूप से शामिल किया जाएगा ताकि छात्रावास और कक्षाओं में चल रही गतिविधियों की सही जानकारी समय पर मिल सके। संवाद
- मेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाले किसी भी छात्र का अहित नहीं होने दिया जाएगा। इसी उद्देश्य से विशेष टीम गठित कर निष्पक्ष जांच कराई जा रही है। वास्तविक दोषी को ही सजा मिलेगी, जबकि किसी निर्दोष छात्र का भविष्य खराब नहीं होने पाएगा। इसका पूरा ध्यान रखा जाएगा। डॉ. हरिओम सिंह, प्राचार्य