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Kaushambi News: बिना पंजीकरण के चार महीने चलता रहा पूर्णिमा हॉस्पिटल

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मंझनपुर। महिला की किडनी निकालने के मामले की जांच के दौरान जिस पूर्णिमा हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर को अफसरों ने सील किया, वह बिना पंजीकरण के ही चार महीने तक संचालित होता रहा, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने ध्यान नहीं दिया। अफसर अब जांच कराने की बात कर रहे हैं।
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जिला अस्पताल के समीप संचालित पू्र्णिमा हाॅस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर पर फतेहपुर के खखरेरू की रहने वाली शालू की किडनी निकालने का आरोप लगा है। डीएम के निर्देश पर शुक्रवार को एसडीएम सदर आकाश सिंह इस मामले की जांच करने अस्पताल पहुंचे थे। वहां पर मरीजों को आईसीयू में रखकर इलाज किया जा रहा था, लेकिन डॉक्टर एक भी मौजूद नहीं थे। नियमों के विपरीत अस्पताल का संचालन देख एसडीएम ने उसे सील कर दिया था।

नियमों की अनदेखी कर संचालित अस्पताल पर अफसरों की नजर शुक्रवार को पड़ी। जबकि अस्पताल चार महीने से बिना पंजीकरण के ही संचालित हो रहा था। 31 अप्रैल को ही अस्पताल का पंजीकरण एक्सपायर्ड हो चुका था, लेकिन संचालक ने नवीनीकरण नहीं कराया। बिना पंजीकरण के ही खुलेआम मरीजों को उपचार होता रहा, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने कोई कार्रवाई नहीं की। जिस महिला की किडनी निकालने का आरोप लगा है, उसका ऑपरेशन भी इसी दौरान किया गया। मामले के तूल पकड़ने के बाद जांच कराने की जगह स्वास्थ्य विभाग ने चार सितंबर को अस्पताल के पंजीयन का नवीनीकरण कर दिया।
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वहीं स्वास्थ्य विभाग के अफसरों का कहना है कि अस्पताल चाहे जितना बड़ा हो, लेकिन बिना पंजीकरण अथवा पंजीकरण खत्म होने के बाद उसका संचालन अवैध है। ऐसे अस्पताल संचालक पर वही कार्रवाई होती है, जो किसी झोलाछाप पर की जाती है।


अस्पताल के पंजीकरण के नवीनीकरण में कई औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती है। कभी-कभी इसमें समय लग जाता है। मामले की जांच चल रही है। रिपोर्ट मिलने के बाद कार्रवाई की जाएगी।-डॉ. सुष्पेंद्र कुमार, सीएमओ
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