यमुना का जलस्तर बढ़ने से तराई के गांवों में बसे लोगों की धड़कनें तेज हो गई हैं। बाढ़ की यही रफ्तार रही तो सोमवार तक मल्हीपुर और नंदा का पुरवा गांव में पानी घुस सकता है। वहीं प्रशासन की तरफ से किए गए बाढ़ राहत इंतजाम नदारद हैं।
यमुना का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। हालात यहीं रहे तो सोमवार तक तराई के गांवों में यमुना का पानी पहुंच जाएगा। प्रशासन की तरफ से दावा किया गया है जिले की तीनों तहसील में कुल 25 बाढ़ राहत चौकी स्थापित की गई है। लेकिन इन चौकियों में राहत के लिए कोई खास इंतजाम नहीं दिख रहे हैं। बाढ़ राहत चौकी में दवा, भोजन सरमग्री, रहने के इंतजाम, नाव और स्टीमर की व्यवस्था किए जाने का दावा किया गया है। लेकिन जिले की बाढ़ चौकियों में यह इंतजाम दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहे हैं। इसकी बानगी तिल्हापुर स्थित जय भीम शिक्षण संस्थान बाढ़ राहत चौकी में देखने को मिली। यह चौकी पिपरहटा गांव से महज एक किलोमीटर की दूरी पर है। रविवार को स्कूल का सिर्फ गेट खुला था।
बाढ़ राहत से जुड़े एक भी कर्मचारी नहीं थे। फिलहाल गंगा किनारे तो बाढ़ का असर अभी नहीं दिख रहा। लेकिन जिस तरह से यमुना ऊफान पर है उससे लोगों की चिंताएं बढ़ गई हैं। वहीं पिपरहटा और उमरवल गांव में चारों तरफ से यमुना का पानी भर जाता है। इससे ग्रामीणों का आवागमन बंद हो जाता है। गांव के लोग नावों या छोटी ढोगी के सहारे अपनी जरूरत का सामान खरीदने के लिए बाहर निकलते हैं। ज्यादा समस्या मवेशियों को होती है।