सरसवां ब्लाक के सन्यासीपुर व कौशाम्बी के धरमपुर गांव के लोगों की पेयजल टंकियां लाइफ लाइन थीं। अब इन टंकियों से पेयजल आपूर्ति नहीं होती। इससे लोगों को बूंद-बूंद पानी के लिए ग्रामीण सुबह से शाम भटकना पड़ता है।
यमुना की तराई में बसे होने के कारण धरमपुर सहित आस-पास के गांवों में बोरिंग कराना कठिन है। ग्रामीणों की पेयजल समस्या को देखते हुए वर्ष 1996-97 में लगभग 30 लाख की लागत से पेयजल टंकी का निर्माण कराया गया। टंकी बनने के बाद इलाके के दिया, छेकवा, भखंदा, पन्ना का पुरा आदि गांवों को पानी की आपूर्ति होने लगी। इन गांवों की लगभग दस हजार आबादी का पेयजल संकट दूर हो गया। लेकिन करीब दस साल से ग्रामीणों को टंकी से बूंद भर पानी की आपूर्ति नहीं हो सकी। तब से लेकर आज तक ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए भटक रहे हैं। लोगों का कहना है कि वे लोग हैंडपंप से पानी लेते हैं। इसके लिए लंबी लाइन लगानी पड़ती है। कभी-कभी पानी के लिए तूतू-मैंमैं हो जाती है।
धरमपुर गांव के प्रधान संतोष सिंह ने कई बार जेई से लेकर जिला प्रशासन को समस्या से अवगत कराया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो सकी। यही हाल सरसवां ब्लाक के सन्यासीपुर गांव में स्थित पेयजल टंकी है। इस टंकी का निर्माण वर्ष 2010 में हुआ था। तत्कालीन डीएम लोकेश एम ने इसका उद्घाटन किया था। इस पेयजल टंकी से खुटहा, मवई, नैनी, दलेलागंज, हीरागंज, सन्यासीपुर गांव समेत एक दर्जन गांवों को आपूर्ति होती थी। करीब साल भर तक आपूर्ति होने के बाद यहां सप्लाई ठप हो चुकी है। मोटर खराब हो चुकी है। कोई सुधार न होता देख लोगों ने मोटर कक्ष में भूसा व पुआल रखने शुरू कर दिए।