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शासनादेश को ठेंगा, नहीं खुल रहे स्कूलों के ताले

Wed, 08 Jun 2016 12:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
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बीआरसी कौशाम्बी के एबीएसए ने शासनादेश को ठेंगा दिखा दिया है। यह इलाके के स्कूलों में लटक रहे ताले बयां कर रहे हैं। शासन के आदेश के बाद मध्याह्न भोजन बनवाने के लिए पखवारे भर में एक भी विद्यालय का ताला नहीं खुल सका। मामले में स्कूलों के जिम्मेदार घर बैठे कागजी कोरम पूरा कर रहे हैं। शासनादेश के हो रहे उल्लंघन में मातहतों को दंडित करने की जगह जिम्मेदार पक्ष लेते देखे जा रहे हैं।
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गर्मी की छुट्टी में प्राथमिक और जूनियर विद्यालयों में मध्याह्न भोजन बनवाए जाने के लिए महकमे के जिम्मेदार संजीदा नहीं है। पखवारे भर का समय बीतने के बाद भी बीआरसी कौशाम्बी के एक भी स्कूलों का ताला नहीं खुल सका। इसके बावजूद एबीएसए कौशाम्बी अजीत सिंह दावा कर रहे हैं अध्यापक स्कूल खोलते हैं पर बच्चे ही नहीं आते लेकिन स्कूलों का ताला नहीं खुला। बानगी के तौर पर पाली उपरहार, चक गुलाम आलम, रसूलपुर बड़गांव, चक ऐलई रोशन, सलेमपुर, चकसिरसी आदि प्राथमिक स्कूलों को लिया जा सकता है। इन स्कूलों में मध्याह्न भोजन बनना तो दूर अध्यापकों ने ताला तक नहीं खोला।

इन स्कूलों में लटक रहे ताले  एबीएसए कौशाम्बी के दावे के सच्चाई को उजागर कर रहे हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि स्कूलों में लटक रहे तालों पर आरोपी अध्यापकों के खिलाफ कार्रवाई करने की जगह एबीएसए उनका पक्ष लेते क्यों देखे जा रहे हैं। बहरहाल कुछ भी हो बीआरसी कौशाम्बी अंतर्गत आने वाले प्राथमिक और जूनियर विद्यालयों में तैनात अध्यापकों के लिए गर्मी की छुट्टी में जारी शासनादेश कोई मायने नहीं रखता।
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बीआरसी कौशाम्बी के कुछ स्कूलों की जांच की गई है। स्कूलों में अध्यापक मिले पर बच्चे नहीं दिखे। मेरा मानना है कि स्कूल खुल रहे हैं पर बच्चे नहीं आ रहे। ऐसे में मध्याह्न भोजन किसे बनवाकर खिलाया जाए।
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अजीत सिंह, एबीएसए कौशाम्बी
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