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खाली कुर्सी बच्चों को बांट रही ज्ञान

Fri, 05 Aug 2016 12:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
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विकास खंड कौशाम्बी के प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को खाली कुर्सी से ज्ञान प्राप्त हो रहा है। बच्चे कुर्सी को देखकर अपने कोर्स की तैयारी करते हैं। उधर, बच्चों को अध्ययन करने की बात कहकर गुरूजी विश्राम कक्ष में थकान दूर कर रहे थे। प्रधानाध्यापक मौके से गायब रहे। दोआबा में सरकारी स्कूलों की स्थिति बेहद खराब है। प्राथमिक शिक्षा में सुधार करने के लिए सरकार पानी की तरह पैसा बहा रही है। वहीं उन पैसों पर मौज करने वाले अधिकारी व शिक्षक औपचारिकता तक ही सीमित हैं।
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परिषदीय स्कूलों में बुनियादी शिक्षा के नाम पर खिलवाड़ किया जा रहा है। पंजीयन के लिए सर्व शिक्षा अभियान अंतर्गत बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा रैली तो निकाली जाती है पर स्कूल जाने वाले बच्चों को पढ़ाने-लिखाने में शिक्षकों का तनिक भी मन नहीं लग रहा है। उदाहरण के तौर पर  प्राथमिक विद्यालय इटैला को लिया जा सकता है। गुरुवार की सुबह नौ बजे यहां का नजारा चौंकाने वाला रहा। विद्यालय में पंजीकृत 87 छात्र-छात्राओं में 37 उपस्थित रहे। इन बच्चों के शिक्षण कार्य का जिम्मा प्रधानाध्यापक राकेश कुमार समेत सहायक अध्यापक अनंदी प्रसाद और ओमिका देवी पर है। गुरुवार को प्रधानाध्यापक स्कूल से गायब रहे। ओमिका देवी कक्षा दो में बच्चों को पढ़ा रही थीं।

बाकी के चार कक्षाओं के बच्चे खाली पड़ी कुर्सी से ज्ञान ले रहे थे। स्कूल में मौजूद सहायक अध्यापक अनंदी प्रसाद विश्राम कक्ष में घर की थकान मिटाते नजर आए। बेसिक शिक्षा के स्कूलों के इस हाल को देख लोग भले ही अपने बच्चों का पंजीयन करा लेते हैं पर पढ़ाई वह निजी स्कूलों में ही कराते हैं। उधर बेसिक शिक्षा के जिम्मेदार हैं कि वह जांच कर कार्रवाई की बात तो करते हैं पर उन्हें इसके लिए कभी फुरसत नहीं मिलती।
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नहीं कराई गई थी प्रार्थना की फोटोग्राफी
परिषदीय स्कूलों में बेसिक शिक्षा अधिकारी के आदेशों का तनिक भी पालन नहीं हो रहा है। उन्होंने स्कूलों में बच्चों और शिक्षकों की उपस्थिति की हकीकत जानने के लिए प्रार्थना के समय फोटोग्राफी कराने का फरमान जारी किया था लेकिन प्राथमिक विद्यालय इटैला के जिम्मेदारों पर इसका कोई असर नहीं दिख रहा। प्रधानाध्यापक के अनुपस्थित रहने के चलते फोटोग्राफी में उनकी पोल खुल सकती थी। इसके चलते सहायक अध्यापक ने बीएसए के आदेश को दरकिनार करते हुए फोटोग्राफी नहीं कराया था।

मिड-डे-मिल का मेन्यू तक नहीं बता सके जिम्मेदार
 प्राथमिक विद्यालय इटैला में गुरुवार को नौ बजे तक मध्याह्न भोजन बनना शुरू नहीं हुआ था। रसोइयां खाना बनाने के लिए आई थी लेकिन गुरुवार को बच्चों के लिए कौन सा भोजन बनेगा इसका उसे पता नहीं था। पूछने पर रसोइयां ने बताया कि गुरूजी ने अभी कोई आदेश नहीं दिया था। जो वह कहेंगे वही बनाऊंगी। इससे साफ है कि स्कूल में मेन्यू का मतलब कुछ नहीं है।
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प्राथमिक विद्यालय इटैला में लापरवाही करने वाले अध्यापकों के खिलाफ जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही अन्य विद्यालयों में भी सख्ती की जाएगी।
डीएस यादव, बीएसए
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