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Kaushambi News: केसरिया के नींबू को कौशाम्बी की पहचान बनाने की तैयारी

Thu, 18 Jan 2024 04:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
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केशरिया गांव में नींबू की बाग देखते कृ​षि विपणन एंव कृ​षि विदेश व्यापार विभाग के अ​धिकारी व कृ​
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सिराथू तहसील के केसरिया के नींबू से अब पूरे जिले की पहचान बनने की तैयारी है। इसके लिए कृषि विपणन व कृषि विदेश व्यापार विभाग के साथ कृषि विज्ञान केंद्र ने प्रयास शुरू कर दिए हैं। वैज्ञानिक नींबू के गुण व विशेषताओं की जांच कर रहे हैं। सब कुछ ठीक रहा तो आने वाले दिन में नींबू को जीआई टैगिंग के लिए भेज दिया जाएगा। इसके बाद यह कौशाम्बी की पहचान से जुड़ जाएगा।
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केसरिया के नींबू की जीआई टैगिंग का प्रयास कृषि विपणन व कृषि विदेश व्यापार के निरीक्षक जितेंद्र यादव, रोहित कुमार व नीरज पाठक और कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ.जितेंद्र प्रताप सिंह ने दो नवंबर को शुरू की है। इसके बाद अधिकारियों का दल केसरिया गांव पहुंचा। दल में शामिल विशेषज्ञों ने नींबू से जुड़ी जानकारियां जुटाईं।
केसरिया गांव में बड़े पैमाने पर नींबू की बागवानी की गई है। यहां से नींबू के नमूने लेकर परीक्षण के लिए कृषि विज्ञान केंद्र भेजा गया है। वैज्ञानिक नींबू की गुणवत्ता, विशेषता आदि पर रिपोर्ट तैयार कर उद्यान विभाग को देंगे। इसके बाद इसे जीआई टैगिंग के लिए भेजा जाएगा।
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क्या होगा लाभ :
नींबू को कौशाम्बी के नाम से जीआई टैगिंग मिलती है तो वह जिले की पहचान बनेगा। इसकी बिक्री केवल और केवल कौशाम्बी के किसान ही कर सकेंगे। इसका लाभ यहां के किसानों को सीधा मिलेगा। देश व विदेशी बाजार में किसी को नींबू की जरूरत होगी तो वह कौशाम्बी से ही इसकी मांग करेगा।

क्या है जीआई टैगिंग :
किसी भी क्षेत्र का जो क्षेत्रीय उत्पाद होता है, वह वहां की पहचान होती है। उस उत्पाद की ख्याति जब देश-दुनिया में फैलती है तो उसे प्रमाणित करने के लिए एक प्रक्रिया होती है। इसे जीआई टैग यानी जीओ ग्राफिकल इंडीकेटर कहते हैं।

नींबू जिले में केसरिया, कड़ा, चायल क्षेत्र में सबसे अधिक होता है। इन दिनों करीब 550 हेक्टेयर क्षेत्र में नींबू का उत्पादन होता है। जीआई टैगिंग की टीम को इसकी जानकारी दी गई है। यदि जीआई टैग मिला तो यह कौशाम्बी के किसानों के लिए बेहतर मौका होगा। इसे भी सुर्खा अमरूद सी पहचान मिलेगी।
- प्रमोद कुमार सिंह, मिशन प्रभारी उद्यान विभाग

नींबू को पहचान मिलती है तो यह हमारे लिए बेहतर होगा। वैसे नींबू के फसल से नुकसान अब तक नहीं हुआ। किसानों के लिए यह लाभकारी है। अब यह जिले की पहचान भी बनेगा।
मलखान सिंह, नींबू के बागवान

गांव में होने वाले नींबू की मांग बाजार में हमेशा रहती है। इसलिए यह कभी घाटे की फसल साबित नहीं हुई। इसे नई पहचान मिली तो यह और लाभकारी होगा।- बेनी प्रसाद, नींबू के बागवान

केशरिया गांव में नींबू की बाग देखते कृषि विपणन एंव कृषि विदेश व्यापार विभाग के अधिकारी व कृ

केशरिया गांव में नींबू की बाग देखते कृषि विपणन एंव कृषि विदेश व्यापार विभाग के अधिकारी व कृ

केशरिया गांव में नींबू की बाग देखते कृषि विपणन एंव कृषि विदेश व्यापार विभाग के अधिकारी व कृ

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