मंझनपुर। प्रधानमंत्री आवास योजना का जिले में प्रधानों ने जमकर मखौल उड़ाया। गांव के पात्र गरीबों को दरकिनार कर पहले अपने परिवार या चहेतों को लाभ दिया गया। नतीजतन गरीबों को पक्की छत देने के नाम पर संचालित योजना प्रधान व सेक्रेटरियों के जेब की कठपुतली बन कर रह गई।
गरीबों को एक अदद पक्की छत मुहैया कराने के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2016-17 में प्रधानमंत्री आवास योजना का संचालन किया था। योजना के तहत वर्ष 2011 में हुई सामाजिक व आर्थिक जनगणना के आधार पर आवास की पात्रता सूची तैयार की गई है। योजना का मकसद था कि उन गरीब परिवारों को पक्की छत उपलब्ध कराई जाए, जिनके मकान कच्चे हों। इस योजना का फायदा जिले के प्रधानों ने खूब उठाया। पात्रता सूची में चहेतों व परिवार के लोगों का नाम डलाकर जमकर धन उगाही की गई। हर साल लक्ष्य आने पर पहले अपने करीबियों को लाभ दिया गया।
अमर उजाला ने इस बाबत पड़ताल किया तो चौंकाने वाली हकीकत सामने आई। नेवादा विकास खंड के धारुपुर गांव में प्रधान रमेश चंद्र ने अपने भाई सुरेश का घर प्रधानमंत्री आवास योजना से बनवा दिया। जबकि गांव की पात्रता सूची में रामचंद्र, मोहन लाल, सुशीला देवी बदहाल व बरसात में टपकती छतों के नीचे रहने को मजबूर हैं। इसी तरह तिलगोड़ी गांव में भी पात्रता सूची में रही शांती देवी को पिछले साल आवास योजना की एक किश्त मिली। शांती का कहना है कि प्रधान ने पहली किश्त जारी होने के बाद उससे 20 हजार की रिश्वत मांगी। पैसा नहीं देने पर दूसरी किश्त जारी नहीं किया गया। इसी तरह शेखपुर रसूलपुर की संगीता पत्नी रामबहादुर के नाम आवास स्वीकृत हुआ है। प्रधान को पैसा नहीं दे पाने के कारण उसे योजना का लाभ नहीं दिया जा रहा है। औधन गांव में प्रधान जगन्नाथ ने अपने भाई लल्ला का आवास योजना से मकान बनवा दिया। लल्ला के पास खुद का चार पहिया वाहन व जमीन है। इसके बाद भी इस गांव में झोपड़ा डालकर रहने वाले श्यामलाल, मंगल, रमेश, छोटू पाल आदि को आवास नहीं दिया जा सका। जबकि यह लोग भी आवास के लिए बनी पात्रता सूची में शामिल हैं।
वर्ष 2011 में बनी सूची के आधार पर आवास योजना का लाभ दिया जा रहा है। आवास आवंटन के बाद बीडीओ उसका सत्यापन करते हैं। इस दौरान किसी लाभार्थी ने पक्का घर बनवा लिया है तो उसे सूची से बाहर किया जाना चाहिए। अगर अपात्र लोगों को योजना का लाभ मिला है तो उच्च स्तरीय जांच कराकर कार्रवाई किया जाएगा।
लक्ष्मण प्रसाद, परियोजना निदेशक