सरांय अकिल पावर हाउस का 44 वर्षीय भवन पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। कंट्रोल रूम से लेकर जेई और लाइनमैन के निवास के लिए बने कमरे टूट-टूटकर गिर रहे हैं। इसके चलते रात में ड्यूटी करने वाले स्टॉफ को खुले में रात बितानी पड़ती है। हद तो तब हो जाती है जब बारिश के दौरान कंट्रोल रूम की छत से पानी टपकने लगता है। पानी से भरे कंट्रोल रूम में कर्मियों को आपूर्ति बंद और चालू करने के लिए जाना पड़ता है।
सरांय अकिल पावर हाउस भवन का निर्माण वर्ष 1972 में कराया गया है। इसमें कंट्रोलरूम के अलावा छह कमरे जेई और लाइनमैन के लिए बने हैं। 44 साल पहले बनवाया गया यह भवन पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। लाइनमैन केशन की मानें तो एक भी कमरा पावर हाउस में ऐसा नहीं जिसमें रात गुजारी जा सके। ऐसे में लोगों को अन्यत्र कमरा लेकर रहना पड़ रहा है। कंट्रोल रूम की भी स्थिति ठीक नहीं है। छत बारिश के दिनों में टपकती है।
कर्मचारियों को मशीनों पर पन्नी डालकर सुरक्षित करना पड़ता है। ऐसे में मशीनों पर पानी तो नहीं जाता पर पूरा कंट्रोल रूम जलमग्न हो जाता है। पानी भर जाने के दौरान लाइनमैन को आपूर्ति चालू करने और शटडाउन लेने जाना पड़ता है। ऐसे में कभी भी किसी कर्मचारी की जान जोखिम में पड़ सकती है। यूं कहें कि सरांय अकिल पावर हाउस में तैनात जेई और लाइनमैन के रहने तक की जगह नहीं है। भवन जर्जर होने के बाद समय-समय पर संबंधित जेई ने इसकी रिपोर्ट विभागीय जिम्मेदारों को भेजी पर महकमे के जिम्मेदार इस ओर तनिक भी ध्यान नहीं दे रहे हैं। इसे लेकर पावर हाउस में तैनात कर्मचारियों में नाराजगी है।
पावर हाउस में जेई और पांच लाइनमैन के अलावा नौ संविदा कर्मी भी काम करते हैं। गर्मी के दिन में तो किसी तरह गुजारा हो जाता है लेकिन जाड़ा और बारिश में उन्हें ड्यूटी देने में कठिनाई होती है। ऐसे में रात्रि ड्यूटी करने वाले संविदा कर्मियों को पावर हाउस के अगल-बगल स्थित मकानों के चबूतरों पर रात गुजारनी पड़ती है। यूं कहें कि भवन न होने से पूरा स्टॉफ बदहाली का शिकार है।
। सरांय अकिल पावर हाउस के कंट्रोल रूम की छत पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है। बारिश के दिनों में छत से टपकने वाला पानी जरा सी चूक पर मशीनों में घुस सकता है। हाई वोल्टेज को कंट्रोल करने वाली इन मशीनों में पानी पहुंचा तो बड़ा फॉल्ट होने के साथ-साथ भयंकर आग लग सकती है। इससे महकमे का लाखों का नुकसान तो होगा ही किसी भी विद्युत कर्मी की जान जा सकती है। इ
सरांय अकिल पावर हाउस में पांच लाइनमैन, एक जेई और नौ संविदा कर्मी हैं। इनमें लाइनमैन और संविदा कर्मियों को बिजली का काम करने के लिए रस्सा, कुप्पी, बेल्ट, शूज, हैंडक्लब, गूगल, हेलमेट आदि सामान विभाग से मिलता है। कर्मियों की माने तो उन्हें यह सामान कई सालों से विभाग नहीं दे सका। ऐसे में काम के दौरान जरा सी चूक पर उन्हें जान से हाथ धोना पड़ सकता है। जिम्मेदार हैं कि उन्हें मातहतों की जान की परवाह ही नहीं है।
पावर हाउस में तैनात कर्मचारियों के लिए भवन की समस्या है। इन कर्मचारियों को काम करने के लिए विभाग से जरूरत का सामान भी नहीं मिल रहा है। भवन और सामान के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा गया है। अब इन समस्याओं से निजात कब मिलेगी इस बावत कुछ नहीं कहा जा सकता।
सौरभ मौर्य, जेई सराय अकिल