बिजली से अछूते गांवों को रोशन करने के लिए संचालित ‘सौभाग्य’ योजना कौशाम्बी में मजाक बन कर रह गई है। सदर विकास खंड के गांवों में योजना के तहत जो भी विद्युतीकरण का कार्य कराया गया वह अधूरा है। इसके चलते ग्रामीणों को बिजली का लो वोल्टेज भीषण गर्मी में और भी चुभन दे रहा है।
सदर विकास खंड के पिपरकुंडी गांव के मजरों में ‘सौभाग्य’ योजना से विद्युतीकरण कराया गया था। गांव में पहले से सौ केवीए का ट्रांसफार्मर लगा था। इसके बाद ज्यादा कनेक्शन होने पर 10 केवीए के 10 नए ट्रांसफार्मर लगाकर बस्तियों को सप्लाई दी गई।
तीन महीने पहले 10-10 केवीए के लगे ट्रांसफार्मर ओवरलोड होने के कारण फुंक गए। इसके बाद गांव में लो वोल्टेज की समस्या हो गई। गांव के लोगों ने मामले की शिकायत बिजली विभाग के अफसरों के साथ ही कार्यदायी संस्था एल एंड टी से की लेकिन खराब हुए ट्रांसफार्मरों को बदला नहीं जा सका। सबसे ज्यादा फजीहत दलित बस्ती की है।
यहां लोगों को कनेक्शन तो दे दिया गया लेकिन बस्ती तक सिर्फ पोल गाड़कर काम छोड़ दिया गया है। लोगों ने 10 मीटर दूरी से तार खींच रखी है। कार्यदायी संस्था के लोग गांव की तरफ झांकने तक नहीं जा रहे हैं। यहीं हाल मुकीमपुर गांव का है। यहां 60 घरों की दलित बस्ती तक न तो पोल गाड़ा गया और न ही किसी को सप्लाई दी गई।
जबकि बस्ती के लोग कनेक्शन लेने के लिए इच्छुक है। भइया मकदूमपुर गांव के भी यहीं हाल है। यहां के लोगों को भी लो वोल्टेज की समस्या से जूझना पड़ रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक बिजली तो मिलती है लेकिन बल्ब जुगनू की तरह जलते हैं।
मामले में अधीक्षण अभियंता सुशील कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि योजना के तहत कराए गए कार्यों की तीन चक्र में जांच कराई जाएगी। इसके बाद ही कार्यदायी संस्था को भुगतान किया जाएगा।