आलू की खेती पिछड़ गई है। इससे किसान परेशान हैं। लगातार हो रही बारिश से आलू की खेती 20 दिन पिछड़ गई है। उद्यान विभाग भी हाथ पर हाथ धरे बैठा है। किसानों के लिए अभी तक आलू का बीज नहीं मंगाया गया है। इससे किसान चिंतित हैं।
जिले में हर वर्ष दस हजार हेक्टेयर मेें आलू की खेती है। उद्यान विभाग के आंकड़ों के मुताबिक आलू की खेती 45 सौ हेक्टेयर में होती है। सबसे ज्यादा फसल सरसवां ब्लॉक के किसान तैयार करते हैं। यहां के किसान लगभग 12 सौ हेक्टेयर में आलू बोते हैं। अभी तक यह आंकड़ा एक हजार हेक्टेयर से ज्यादा नहीं बढ़ सका है। बारिश की वजह से खेत तैयार नहीं हो सके हैं। जिन्होंने पहले खेती कर भी ली थी, उनके आलू मिट्टी के नीचे ही सड़ गए। इससे किसानों को दोहरा नुकसान हुआ है। 20 सितंबर से आलू की बुवाई शुरू हो जाती है, लेकिन लगातार बारिश ने किसानों को निराश कर दिया है।
यही कारण कि है कि बीज के लिए कोल्ड स्टोर से आलू नहीं निकलवाया जा रहा है। उद्यान विभाग भी अबकी इस मामले में सुस्ती बरत रहा है। अभी तक उद्यान विभाग ने आलू का बीज नहीं मंगवाया है, जबकि उद्यान विभाग का आलू बीज लेने के लिए किसानों में मारामारी मची रहती है। वहीं प्रभारी उद्यान अधिकारी मेवाराम का कहना है कि 20 सितंबर से आलू की बुवाई शुरू हो जाती है। आलू का बीज अभी नहीं आया है। जल्द ही आलू का बीज मंगाकर पहले आओ, पहले पाओ की तर्ज पर वितरित किया जाएगा।
रसीद कटाकर खींच लिया हाथ
आलू की खेती करने वाले किसानों ने कोल्ड स्टोर से आलू निकलवाने के लिए रसीद कटा ली थी। शुक्रवार, शनिवार को हुई बारिश को देखते हुए किसानों ने कोल्ड स्टोर से आलू ही नहीं निकलवाया। मौसम साफ होता नहीं दिख रहा है। इससे जिले के किसान उलझन में हैं।