सरसवां पीएचसी के कर्मचारियों ने शुक्रवार की सुबह परिसर के अंदर ही स्टोर में रखी दवाओं को आग के हवाले कर दिया। इतना ही नहीं सैकड़ों की संख्या में सिरप को नाले में फेंक दिया गया। दवा लाखों रुपये कीमत की बताई जा रही है। पीएचसी प्रभारी का लोगों ने घेराव किया तो उन्होंने मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया। इस मामले में एडी हेल्थ का कहना है कि वह प्रकरण की जांच कराएंगे, जो भी दोषी हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई करेंगे।
सरसवां पीएचसी के अंदर बने कर्मचारी आवास के बगल में स्थित चहारदीवारी के बगल से लोगों ने शुक्रवार दोपहर धुआं उठते देखा। इसकी जानकारी होते ही सड़क किनारे मौजूद लोग भागकर वहां पहुंचे तो नजारा देख दंग रह गए। करीब दो कुंतल से ज्यादा सिलबंद डिब्बों में रखी दवाएं जल रही थीं। इनमें दर्जनों कंपनियों की पैरासिटामॉल, फोरिक ऐसिड, कैलिश्यम, इंफ्राक्सिन , सिफलाक्सिन, ऐलबेंडाजोल आदि दवाएं थीं। लोगों ने आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन वह कामयाब नहीं हो सके। बगल के नाले में देखा तो उसमें सैकड़ों की संख्या में फोरिक एसिड कई महत्वपूर्ण कंपनियों के सिरप पड़े थे। सिरप व दवाएं एक्सपायर नहीं थीं।
कर्मचारियों की इस लापरवाही पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। कांग्रेस के महासचिव आशीष मिश्र उर्फ पप्पू मिश्र व वेद प्रकाश पांडेय, बसपा नेता प्रभांजय सिंह मौके पर पहुंचे और पीएचसी प्रभारी डॉ. अशोक कुमार का घेराव कर हंगामा शुरू कर दिया। डॉक्टर ने मामले में कार्रवाई का आश्वासन देकर किसी तरह पीछा छुड़ाया। जनप्रतिनिधियों के बाहर आते ही वह भी पीएचसी से गायब हो गए। मामले में पीएचसी प्रभारी डॉ. अशोक कुमार का कहना है कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी। प्रकरण की जांच उन्होंने बैठा दी है। इस मामले में फिलहाल स्टोर इंचार्ज जीपी सिंह का वेतन रोका जाता है। एडी हेल्थ का कहना है कि प्रकरण बहुत गंभीर है। वह इसकी गंभीरता से जांच कराएंगे, जो लोग भी इसके लिए जिम्मेदार हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।
सीएमओ डा. एसके उपाध्याय का कहना है कि कोई पागल ही इस तरह की हरकत कर सकता है। यदि दवाएं एक्सपायर नहीं थी तो कोई क्यों जलाएगा। बहरहाल वह इसकी जांच कराएंगे। जांच में मामला सही पाए जाने पर कार्रवाई करेंगे।
सच छिपाने के लिए जलाई जाती हैं दवाएं
सरसवां पीएचसी में जलाई गई दवा के एक नहीं तमाम कारण हैं। अस्पताल के कई ऐसे सच पर पर्दा डालने की कोशिश की गई है, जिसको लेकर हमेशा आवाज उठती है। कर्मचारियों ने बताया कि डॉक्टर बैठते नहीं है, तो दवा किसको दी जाए। हर महीने दवा का उठान भी स्टोर इंचार्ज करता है। ऐसे में इन दवाओं को फर्जी आंकड़ों में वितरण दिखाकर इस तरह का खेल किया जाता है।
सरसवां पीएचसी में जलाई गई दवाओं ने पूरे महकमे को ही सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। दवाएं एक्सपायर नहीं थी, इसके बावजूद उनको जला दिया गया। सिरप भी नाले में बहा दिए गए। इनमें आयुर्वेदिक सिरप भी शामिल हैं, जो एक्सपायर ही नहीं होते। मामले का खुलासा होने से स्वास्थ्य विभाग में खलबली मची है। सीएमओ ने यह कहकर फिलहाल बचाव किया होगा कि कोई पागल ही इस तरह की हरकत कर सकता है, लेकिन वह भी जलाई गई दवाओं को लेकर गंभीर है। हतप्रभ पीएचसी प्रभारी डॉ. अशोक कुमार भी हैं, लेकिन उनकी बिना इजाजत कैसे कोई कर्मचारी इतना बड़ा कदम उठा सकता है, ये सवाल जरूर उनके लिए परेशानी का कारण बना हुआ है।
पीएचसी के एक कर्मचारी ने बताया कि यदा कदा ही यहां डॉक्टर आते हैं, जबकि दवाएं हर महीने स्टोर से उठाई जाती है। डॉक्टरों की नौकरी बचाने के लिए जबरन यहां मरीजों की उपस्थिति दिखाई जाती है और दवाओं का वितरण भी अभिलेखों में दिखाया जाता है, जबकि दवाएं डंप रहती हैं। इसी खेल पर पर्दा डालने के लिए इन दवाओं को जलाया गया। कर्मचारी की यह बात काफी हद तक सही है, क्योंकि दवाओं को जलाने का इसके अलावा कोई दूसरा कारण फिलहाल हंगामा करने वालों के सामने नहीं आया था। पीएचसी व सीएचसी को दवा का वितरण करने वाले स्टोर इंचार्ज गजेंद्र सिंह का कहना है कि जितनी दवाएं वह स्टोर से देते हैं, जब उनका पूरा वितरण दिखा दिया जाता है, तभी उनके पास दवा भेजने की डिमांड की जाती है। अभिलेख दुरुस्त होने पर ही वह दवा की नई खेप देते हैं। बताया कि अमूमन हर महीने दवा स्टोर से भेजी जाती है।