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Kaushambi News: पितृ पक्ष पर करें अकाल मृत्यु वाले पुरखों का श्राद्ध, आत्मा को मिलती है शांति

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पितृपक्ष की चतुर्दशी शनिवार को है। शास्त्रों के मुताबिक इस दिन अकाल मृत्यु का शिकार हुए पुरखों की आत्मा की शांति के श्राद्ध, तर्पण किया जाता। ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से अकाल मौत का शिकार हुए पुरखों की आत्मा को शांति मिलती है।
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भारतीय संस्कृति में पितरों के प्रति विशेष सम्मान और श्रद्धा रखने की परंपरा है। यही कारण है कि हर साल पितृ पक्ष के दौरान पूर्वजों को याद करते हुए उनके लिए श्राद्ध कर्म किए जाते हैं।
हुबलाल संस्कृत महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य पं. ज्ञानेंद्र शास्त्री ने बताया कि पितृ पक्ष में हर दिन का अलग महत्व है। चतुर्दशी तिथि पर उन पुरखों का तर्पण किया जाता है जिनकी हत्या, आत्महत्या या दुर्घटना में मौत हुई हो। यह श्राद्ध उनकी आत्मा की शांति के उद्देश्य से किया जाता है।
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चतुर्दशी श्राद्ध की विधि
इस दिन सुबह उठकर स्नान करें। घर की अच्छी तरह सफाई के बाद गंगाजल का छिड़काव करके घर को शुद्ध करें। इसके बाद पितरों का ध्यान करते हुए उनका श्राद्ध करने का संकल्प लें। कुतुप काल में, पितरों को जल, काले तिल, जौ और सफेद फूल मिलाकर तर्पण करें। पिंडदान के लिए जौ, चावल और काले तिल से पिंड बनाकर पितरों को अर्पित करें। इसके बाद गाय, स्वान, कौवा, देवता और चींटी के लिए भोजन का अंश निकालें। ब्राह्मणों को भोजन कराकर दक्षिणा दें।
स्वाभाविक मृत्यु वालों का श्राद्ध न करें
इस दिन केवल उन्हीं पितरों का श्राद्ध करें जिनकी मृत्यु अकाल हुई हो। स्वाभाविक मृत्यु वाले पितरों का श्राद्ध उनकी मृत्यु तिथि या सर्वपितृ अमावस्या पर करना चाहिए।
श्राद्ध करने का सही समय
श्राद्ध कर्म दोपहर के समय करना चाहिए। पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान और श्राद्ध करने का कुतुप काल सुबह 11:36 बजे से दोपहर 12:24 बजे तक माना गया है। मान्यता है कि दोपहर एक बजे से पहले श्राद्ध कर लेना चाहिए।
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