दोआबा के 55 परिवारों के बच्चे जो गायब हुए वे आज तक नहीं मिले। इन परिवारों को सालों से अपने लाडलों का इंतजार है। इंतजार में अब तो आंखें पथरा गई हैं। वहीं, पुलिस गुमशुदगी दर्ज करने के बाद बच्चों को भूल सी गई है। कौशाम्बी पुलिस के रिकॉर्ड पर नजर डालें तो साल 2006 से लेकर अब तक विभिन्न परिस्थितियों में गुम हुए करीब 55 नाबालिगों का कोई सुराग नहीं लग सका है। इन्हें अपनों से मिलाने के लिए शासन ने ‘ऑपरेशन मुस्कान’ समेत कई अभियान छेड़ रखे हैं। समय-समय पर सरकार और आला अधिकारियों की ओर से गुमशुदा बच्चों को तलाशने का निर्देश भी जारी किए जाते हैं।
अपराध समीक्षा बैठकों में कप्तान खुद कोतवालों को फटकार लगाते हैं। अफसोस कि इसका कोई नतीजा नहीं निकल रहा है। गुम हुए बच्चों को खोजने के ठोस प्रयास नहीं हुए। परिणाम रहा कि वे सालों बाद भी नहीं मिल सके। इसे लेकर इनके परिजन खासे परेशान हैं। अब भी वे रास्तों को इस आस के साथ देखते हैं कि हो सकता है उनका लाडला घर आ रहा हो। वहीं, पुलिस गुमशुदगी दर्ज करने के बाद अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर चुकी है। हालांकि एएसपी ने जल्द ही गुमशुदा बच्चों की तलाश के लिए विशेष अभियान चलवाने की बात कही है।
नियमानुसार गुम हुए बच्चों के मामलों के फोटो छपवाकर उन्हें सभी कोतवालियों व अन्य सार्वजनिक स्थानों पर चिपकवाना चाहिए। देखा जाता है कि विशेष मामलों में ही कौशाम्बी पुलिस ऐसा करती है। वो भी फोटो संबंधित कोतवाली में ही चस्पा कराया जाता है। इससे साफ है कि पुलिस गुमशुदा को खोजने का दिल से प्रयास नहीं करती है। पूरी जिम्मेदारी के साथ कोशिश की जाती तो हो सकता है कि इन 55 में से कुछ बच्चे आज शायद अपनों के बीच होते।
इनका कहना है
गुमशुदा बच्चों को खोजने का पुलिस पूरा प्रयास कर रही है। इसमें कोई कोतवाल या विवेचक लापरवाही करता है तो जांच कराकर उसके खिलाफ कार्रवाई कराई जाएगी। जो बच्चे सालों से नहीं मिले हैं, उनकी तलाश के लिए विशेष अभियान चलवाया जाएगा।
समर बहादुर- अपर पुलिस अधीक्षक