जिला मुख्यालय स्थित मेडिकल कॉलेज में प्योर टोन आड्यूमेट्री (सुनने की क्षमता) की जांच की सुविधा नहीं है। इसकी वजह से न केवल कान के रोगी, बल्कि दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने वाले भी परेशान हो रहे हैं। कारण, इन्हें जांच के लिए प्रयागराज जाना पड़ता है।
संयुक्त जिला चिकित्सालय को मेडिकल कॉलेज तो बना दिया गया है, लेकिन अब भी तमाम सुविधाएं यहां नहीं हैं। यहां ईएनटी विभाग की ओपीडी में ऐसे लगभग 60 से 70 मरीज रोज आते हैं।
ईएनटी सर्जन हैं और नाक, कान तथा गले की छोटी-मोटी जांचें भी हो जाती हैं, लेकिन सुनने की क्षमता की जांच नहीं हो पाती है। सुनने की क्षमता का पता लगाने के लिए यह जांच बेहद जरूरी है। इसके लिए पीटीए मशीन आती है और उसे ऑपरेट करने के लिए आड्यूमेट्रिस्ट की तैनाती होती है।
मेडिकल कॉलेज में न तो यह मशीन है और न ही उसका टेक्नीशियन। ओपीडी में प्रतिदिन तीन से चार रोगी ऐसे आते हैं, जिन्हें चिकित्सक इस जांच की सलाह देते हैं। जिला अस्पताल में व्यवस्था नहीं होने से ऐसे रोगियों को प्रयागराज के मोती लाल नेहरू मंडलीय चिकित्सालय रेफर कर दिया जाता है।
सिर्फ इलाज कराने के लिए आने वाले रोगी ही नहीं, बल्कि सुनने में असमर्थ दिव्यांगों को भी दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने के लिए इस समस्या से जूझना पड़ता है।
चिकित्सीय सलाह आसान, जांच कराना मुश्किल
टेवां निवासी मथुरा प्रसाद ने बताया, करीब तीन महीने से सुनने में दिक्कत हो रही है। जिला अस्पताल में दिखाया तो कान के परदे की जांच के लिए प्रयागराज रेफर कर दिया। डॉक्टर की सलाह तो आसानी से मिल गई, लेकिन अब जांच करा पाना मुश्किल है। करारी के इसरार अहमद बोले, बड़े भाई जावेद को सुनाई नहीं देता। 15 दिन पहले दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आवेदन किया था, लेकिन काम नहीं हुआ। डॉक्टर ने प्रयागराज जाकर जांच कराने की बात कही है।
संयुक्त जिला चिकित्सालय अब मेडिकल कॉलेज बन गया है। उम्मीद है कि जल्द ही यहां भी सुविधाएं बढ़ जाएंगी। पीटीए जांच की व्यवस्था भी शीघ्र ही होगी।
डॉ.एसके शुक्ला
प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज