रामसर स्थल क्या है?
रामसर स्थल ऐसे अंतरराष्ट्रीय महत्व के आर्द्र क्षेत्र (वेटलैंड) होते हैं, जिन्हें जल, जैव विविधता और प्रवासी पक्षियों के संरक्षण के लिए विशेष मान्यता दी जाती है। इसका नाम ईरान के रामसर शहर से पड़ा, जहाँ 2 फरवरी 1971 को रामसर कन्वेंशन (अंतरराष्ट्रीय संधि) पर हस्ताक्षर हुए थे। इस संधि के तहत नामित आर्द्र क्षेत्रों को ही रामसर स्थल कहा जाता है।
रामसर स्थल बनने पर क्या बदलता है?
रामसर स्थल घोषित होने के बाद आर्द्र क्षेत्र के संरक्षण और वैज्ञानिक प्रबंधन को प्राथमिकता मिलती है। केंद्र और राज्य सरकार से वित्तीय व तकनीकी सहयोग मिलने की संभावना बढ़ती है। जैव विविधता, प्रवासी पक्षियों और प्राकृतिक आवास के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाता है। साथ ही, पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन, शोध और स्थानीय लोगों के लिए आजीविका के नए अवसर विकसित होने की संभावना भी बढ़ जाती है।
जिले से भेजे गए प्रस्ताव पर शासन स्तर पर अलवारा झील को रामसर स्थल का दर्जा मिलने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। उम्मीद है कि स्वतंत्रता दिवस से पहले अधिसूचना जारी हो जाएगी। यह उपलब्धि न केवल कौशाम्बी, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण होगी और अलवारा झील के संरक्षण का नया अध्याय शुरू करेगी। - अजय कुमार पांडेय, डीएफओ
* रामसर स्थल बनने के बाद होंगे ये बदलाव
- अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार झील का संरक्षण।
- समग्र प्रबंधन योजना लागू होगी।
- जैव विविधता संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा।
- अतिक्रमण और प्रदूषण पर सख्त निगरानी।
- ईको-टूरिज्म, शोध कार्य तथा केंद्र व राज्य सरकार से वित्तीय एवं तकनीकी सहयोग की संभावनाएं बढ़ेंगी।