मानसून की सुस्त चाल खेती पर असर डाल रही है। धान की रोपाई के समय खेत सूखे हैं। यह देख किसानों की आंखें भीगी हैं। खेत में डाली गई नर्सरी भी धूप और गर्मी की वजह से सूखने लगी है।
वहीं, जिले में इसबार 64,110 हेक्टेयर धान की रोपाई होनी है लेकिन बारिश के दगा देने की वजह से बेहन लग नहीं हो पा रही है। अधिकांश किसान बारिश का इंतजार कर रहे हैं। दूसरी ओर गर्मी और बिजली कटौती ने भी खेती-किसानी पर असर डाला है।
जिले के अधिकांश किसान बारिश व नहरों के पानी के सहारे खेती करते हैं। धान की सिंचाई के साधन सीमित होने की वजह से बारिश का महत्व रहता है लेकिन अब मानसून में देरी किसानों की असल परेशानी बन रहा है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार बिजली ट्रिपिंग और चार से पांच घंटे की कटौती भी बड़ी वजह है।
रोपाई में देरी तो कम होगी पैदावार
जिला कृषि वैज्ञानिक डॉ. मनोज सिंह ने बताया कि अगर जुलाई के पहले सप्ताह तक अच्छी बारिश नहीं होती है तो धान की खेती पर असर पड़ेगा। 15 जुलाई तक रोपाई न होने पर उत्पादन में गिरावट तय है। इससे प्रति हेक्टेयर लगभग 25 से 30 प्रतिशत तक उपज कम हो सकती है।
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नर्सरी तरह तैयार है लेकिन खेत में पानी नहीं है। बारिश का इंतजार कर रहे हैं। अगर जल्द बारिश नहीं हुई तो खेती का हिसाब-किताब बिगड़ जाएगा। राजेंद्र सिंह, उदहिन खुर्द
जिनके पास ट्यूबवेल है, वह किसी तरह से रोपाई कर ले रहे हैं लेकिन छोटे किसान तो सिर्फ बारिश के सहारे हैं। अगर मानसून देर से आया तो रोपाई पिछड़ेगी। निजी संसाधनों से खेत भरने में लागत बढ़ेगी। - फूल सिंह यादव, किसान
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बारिश नहीं होने से खेत सूखे हैं और उमस लगातार बढ़ रही है। समय पर रोपाई नहीं हुई तो पैदावार घटेगी, इससे पूरे साल की आमदनी प्रभावित होगी। देव मुनि सिंह, बंबूपुृर
देव मुनि सिंह, किसान
देव मुनि सिंह, किसान
देव मुनि सिंह, किसान