सदर ब्लॉक के गुवारा तैयबपुर की 142 साल पुरानी रामलीला के अधिकतर पात्र गांव के होते हैं। पात्र सारा काम छोड़कर 11 दिन तक रामलीला के मंचन में रम जाते हैं। खास बात यह है कि अहिरावण की भूमिका निभाने वाले स्वर्ण सिंह व रावण का किरदार अदा करने वाले कंधई लाल राजपूत खेती-किसानी करते हैं। वहीं परशुराम की भूमिका निभाने वाले सुभाष विश्वकर्मा गांव में डॉक्टरी करते हैं।
रामलीला में राम-लक्ष्मण, सीता को छोड़कर बाकी सभी पात्र गांव के होते हैं। इनमें कोई किसान है तो कोई व्यापार करता है, तो कुछ लोग रोजी-रोटी के सिलसिले में परदेश रहते हैं। मेघनाद की भूमिका अदा करने वाले कमलेश यादव ने अचार-मुरब्बा सेंटर खोल रखा है। दशरथ का पात्र अदा करने वाले वीरेंद्र द्विवेदी एक कोल्ड स्टोर में लिखापढ़ी का काम करते हैं।
कुंभकरण की भूमिका निभाने वाले गोपाल विश्वकर्मा उत्तराखंड में एक फैक्टरी में काम करते हैं। सुशेण वैद्य का किरदार निभाने वाले फूल चंद्र वर्मा पान की दुकान चलाते हैं। अक्षय कुमार की भूमिका निभाने वाले हरिशचंद्र मौर्य पंक्चरए तो सुतीक्षण की भूमिका निभाने वाले सुरेंद्र द्विवेदी पुरोहित का काम करते हैं।
दो व तीन को लगेगा मेला
रामलीला में लंका दहन के बाद से गांव में मेले का आयोजन होगा। दो व तीन अक्तूबर को मेले के दौरान ही लंका दहन और रावण वध का मंचन होगा। चार अक्तूबर को केवल महिलाओं के लिए मेले का आयोजन होगा।
रामलीला कार्यक्रम
23- सितंबर को मुकुट पूजा
24 सितंबर -नारदमोह, राम रावण जन्म।
25 सितंबर- मुनि आगमन, तड़का वध।
26 सितंबर- नगर दर्शन, फुलवारी लीला।
27 सितंबर- धनुष यज्ञ,
28 सितंबर -परशुराम लक्ष्मण संवाद, रामविवाह।
29 सितंबर -रामबन गमन, चित्रकूट निवास।
30 सितंबर- सूर्पनखा की नककटी, सीता हरण।
01 अक्टूबर-राम सुग्रीव मित्रता, बाली वध।
02 अक्टूबर-लंका दहन, मेघनाद वध।
03 अक्टूबर-अहिरावण, रावण वध।
04 अक्टूबर-भरत मिलाप, कलात्मक चौकी