मंझनपुर। गांवों में जलनिकासी के प्रबंधन की योजना बनाई गई है। नाली या सीवर का पानी आबादी के बीच स्थित तालाब में नहीं गिरने दिया जाएगा। जरूरत पड़ने पर आबादी से बाहर शोक पिट (सोख्ता) या तालाब बनवाया जाएगा। इस बाबत शासन की ओर से सभी जिलों के सीडीओ और डीपीआरओ को निर्देश जारी किए गए हैं।
ग्रामीण क्षेत्र की बड़ी समस्या जलनिकासी है। कहीं नाली निर्माण नहीं होने से सड़कों पर पानी बहता है तो कहीं नालियों की वजह से आबादी के बीच मौजूद तालाबों घरों का गंदा पानी गिरता है। इससे गंदगी के साथ ही संक्रामक बीमारियों का खतरा बना रहता है। 25 जनवरी को ग्राम्य विकास एवं पंचायती राज विभाग की समीक्षा में समस्या सामने आने पर सीएम ने गांवों को स्वच्छ बनाए रखने के लिए उपाय करने के निर्देश दिए हैं। सीएम के निर्देश पर प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास एवं पंचायती राज अनुराग श्रीवास्तव ने सभी मुख्य विकास अधिकारियों व जिला पंचायत राज अधिकारियों को पत्र भेजकर कहा है कि गांवों में स्वच्छता होनी चाहिए। कहीं जलभराव नहीं होना चाहिए।
नालियों तथा सीवर का गंदा पानी भी आबादी के बीच स्थित तालाबों में नहीं गिराया जाना चाहिए। जिन गांवों में जलनिकासी की व्यवस्था न हो वहां मनरेगा या किसी अन्य मद से शोक पिट (सोख्ता गड्ढा) या तालाब बनवाया जा सकता है। इसके अलावा हैंडपंपों के आसपास भी सफाई रखने के निर्देश दिए गए हैं। प्रमुख सचिव ने सभी जिम्मेदार अफसरों को इस नए निर्देश पर कार्रवाई करने के लिए कहा है। सीडीओ इंद्रसेन सिंह का कहना है कि गांवों को स्वच्छ बनाए रखने के लिए पहले से ही प्रयास चल रहा है। पत्र मिलने के बाद सभी खंड विकास अधिकारियों को इसमें तेजी लाने के निर्देश दे दिए गए हैं।