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नोट बंदी की मार, किसान लाचार

Mon, 14 Nov 2016 12:35 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
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धान की भरपूर उपज होने के बाद भी किसान की जेब खाली है। खून के आंसू रोने के लिए किसान मजबूर हैं। वजह साफ है कि धान खरीद केंद्रों में बड़ी नोट बंद होने के कारण खरीद नहीं हो रही है। इस वर्ष 16-17 में किसानों का 30 हजार मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य रखा गया था। इसके लिए विभिन्न संस्थाओं के 32 क्रय केंद्र खोले गए हैं। एक नवंबर से सरकार ने खरीद का दावा भी किया था, लेकिन 12 नवंबर तक किसानों से एक दाना भी नहीं खरीदा गया। यही है नोट बंद होने की सच्चाई।
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    धान की अच्छी पैदावार देख शासन ने इस साल खरीद के लिए विभिन्न एजेंसियों के 32 क्रय केंद्र जिले भर में खुलवाए। जिला खाद्य एवं विपणन विभाग ने शासन की मंशा को देखते हुए एजेंसियों को एक नवंबर से धान खरीद शुरू करने का निर्देश अक्तूबर माह के आखिरी सप्ताह में दे दिया। इसके लिए डीएम अखंड प्रताप सिंह की अध्यक्षता में बैठक भी हुई। शासन के निर्देश पर जिले में क्रय केंद्रों का चिन्हांकन तो हो गया पर एक भी केंद्र में तौल नहीं शुरू हुई। किसानों का कहना है कि अबकी बार उनके पास पर्याप्त मात्रा में धान है, लेकिन खरीद केंद्र बंद होने से वह धान नहीं बेच पा रहे हैं। बताया कि धान न बिकने से उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। ऊनों गांव के किसान नरनारायन मिश्र, सरसवां के तिलक नारायण द्विवेदी, उमेश चंद्र पांडेय, कल्लू करवरिया बताया कि ने तीन दिन पहले धान क्रय केंद्र न खुलने की शिकायत उन्होंने की थी। इसके बावजूद क्रय केंद्रों पर धान खरीद के लिए कोई सक्रियता नहीं दिख रही है। इसे लेकर जिले भर के किसान हैरान-परेशान हैं।

धान गीला होने का बना रहे बहाना
एक नवंबर से क्रय केंद्रों पर होने वाली धान की खरीद 13 तक नहीं शुरू हो सकी। धान खरीद का पहला पखवारा बीतने के बाद भी क्रय केंद्रों में सन्नाटा छाया हुआ है। ऐसा नहीं है किसान धान बेचने के लिए क्रय केंद्रों तक नहीं पहुंच रहें हैं, लेकिन निर्धारित केंद्रों पर खरीद का कोई इंतजाम ही नहीं है। मामले में जब महकमे के जिम्मेदारों से पूछा गया तो उनका कहना है कि धान खरीद जानबूझकर रोकी गई है। अभी किसानों का धान गीला है। गीले धान की तौल कराने पर क्रय केंद्रों प्रभारियों और महकमे को भारी घाटा हो सकता है।
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कहां बने हैं क्रय केंद्र, मालूम नहीं
किसानों का धान खरीदने के लिए हॉट शाखा सहित विभिन्न संस्थाओं के 32 केंद्रों को चिह्नित किया गया है। इन संस्थाओं के जिम्मेदारों को एक नवंबर से धान खरीद कराने का जिम्मा भी सौंपा गया, लेकिन धान की खरीद होना तो दूर केंद्र हैं कहां इसका अता-पता नहीं चल पा रहा है। म्योहर गांव के किसान शिवसरन सिंह का कहना है कि उनके पास 12 बीघा में पैदा की गई धान की फसल है। कटाई के बाद बिक्री के लिए उसे रखा गया है। क्रय केंद्रों का पता न लगने से बिक्री नहीं हो पा रही है। ऐसे कई किसान हैं जिन्होंने क्रय केंद्र खुलने के इंतजार में अपना धान निजी व्यापारियों को तौल दिया है।

व्यापारियों के धान से पूरा किया जाएगा लक्ष्य
शासन ने 32 क्रय केंद्रों के भरोसे 30 हजार मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य रखा है। जिले के जिम्मेदार इस लक्ष्य को पाने के लिए एक नवंबर से खरीद शुरू करने का निर्णय लिया था, लेकिन नवंबर माह का पहला पखवारा बीतने को है और एक तोला खरीद नहीं हो सकी। किसानों के धान की खरीद न होने को लेकर किसानों में अब तरह-तरह के सवाल उठने लगे हैं। उनका कहना है कि जब किसान अपना धान व्यापारियों के हाथ बेच देगा तब क्रय केंद्र कहां से खरीद करेगा। ऐसे में समर्थित मूल्य का लाभ सीधे व्यापारियों को देते हुए केंद्र प्रभारी धान की खरीद कर लक्ष्य पूरा कर लेंगे।

धान खरीद जीरो है। यह महकमे की बड़ी लापरवाही को उजागर करता है। क्रय केंद्रों पर खरीद क्यों नहीं हो रही इसका स्थलीय सत्यापन एक-दो दिन में कराया जाएगा। क्रय केंद्र प्रभारियों की लापरवाही मिली तो कार्रवाई की जाएगी।
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श्रीकृष्ण, एडीएम कौशांबी
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