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बैंक खुलते ही उड़ गए छह करोड़

Fri, 11 Nov 2016 12:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
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पांच सौ व एक हजार की नोट बदलने के लिए गुरुवार को बैंकों में भारी भीड़ उमड़ी। सुबह से लेकर शाम तक लोगों की लाइन लगी रही। छह करोड़ की 100, 50, 20 व दस की करेंसी बैंकों में थी, जो दोपहर तक खाली हो गई। इसके बाद बैंकर्स ने ग्राहकों से रुपया जमा कराए, लेकिन लोगों को भुगतान नहीं किया।
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   जिले में भारतीय स्टेट बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, यूनियन बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, ग्रामीण बैंक समेत आदि बैंकों की कुल 125 बैंक शाखाएं हैं। गुरुवार की सुबह तक सभी बैंकों के पास कुल 192 करोड़ रुपया था। इनमें छह करोड़ के 100, 50, 20 और 10 की करेंसी थी। बैंक सुबह आठ बजे खुले। इसकी जानकारी लोगों की थी। सुबह से ही लोग बैंक में रुपया जमा करने व नोट बदलने के लिए इकट्ठा हो गए थे। बैंक कर्मचारियों ने पहचान पत्र के साथ फार्म भराने के बाद ही रुपया जमा कराया। यही प्रक्रिया नोट बदलने वालों के साथ हुई। इसको लेकर बैंक कर्मियों से लोगों की किचकिच भी हुई। दोपहर करीब दो बजे छह करोड़ रुपये की लोगों ने नोट बदली।

इनमें से अधिकांश लोगों को भुगतान ही नहीं किया। वह रुपया जमा करने के लिए ही बैंक गए थे। करेंसी खाली होने पर कई लोगों को बैंकों से वापस भी लौटना पड़ा। इसकी सबसे बड़ी वजह यही रही कि बैंक में करेंसी नहीं थी और कैश डिलेवरी वाहन बैंकों तक नहीं पहुंच सका था। नोट बदलने के चक्कर में सबसे ज्यादा किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। एसबीआई व बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखाओं में लंबी लाइन लगी रही। इस दौरान धक्का-मुक्की भी हुई। लोगों ने शोर भी मचाया। सुरक्षा के तगड़े इंतजाम किए गए थे, सुबह से लेकर शाम तक पुलिस बैंकों में तैनात रही।
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एडीएम दिनेश मिश्र का कहना है कि जिले के सभी बैंकों में 192 करोड़ रुपया था। इनमें छह करोड़ की छोटी नोट का वितरण हो चुका है। गुरुवार की शाम तक नई नोटें आई हैं। इनका वितरण शुक्रवार से शुरू हो जाएगा।

शाम को आई नई करेंसी, आज से होगा वितरण
जिले में पांच सौ व दो हजार की नई नोट गुरुवार की शाम तक आई। इस वजह से बैंकर्स ने छोटी नोटों का ही वितरण किया। हालांकि इसको लेकर बैंकर्स परेशान रहे। यही कारण था कि दोपहर तीन बजे तक छह करोड़ रुपये वितरित हो चुके थे। शाम को पांच सौ व दो हजार की नई नोट बैंकों में पहुंच गई। इस करेंसी का वितरण बैंकर्स शुक्रवार से करेंगे। बैंक मैनेजरों का मानना है कि नई नोट आने से काफी हद तक स्थिति ठीक हो जाएगी।

आज से शुरू हो जाएंगे एटीएम
जिले में लगे एटीएम शुक्रवार से काम करना शुरू कर देंगे। नई करेंसी एटीएम में लोड कर दी गई है। शाम से यह कार्रवाई कैश डिलेवरी वैन से की गई। बैंक मैनेजरों ने बताया कि शुक्रवार से लोग एटीएम से रुपया निकाल सकेंगे।

नोटों का जंजाल, आम आदमी बेहाल
सेहिया के रामकृपाल करीब 60 वर्ष के हैं। गुरुवार की दोपहर वह तीन किमी पैदल चलकर एसबीआई मंझनपुर आए थे। बैंक में घुसते ही उनके होश उड़ गए। लंबी-लंबी लाइन देख उनको यही नहीं सूझ रहा था कि क्या करें। पासबुक लेकर आए थे, लेकिन आधार कार्ड नहीं था। किसी तरह वे काउंटर तक पहुंचे तो उन्हें वापस कर दिया गया। उन्हें कोई यह भी बताने वाला नहीं था कि वह क्या करें। नतीजतन मायूस होकर फर्श पर बैठ गए। रामकृपाल जैसे तमाम लोगों की गुरुवार को यही स्थिति थी। वृद्ध रामकृपाल ने बताया कि कभी सरकार से उन्हें मिला तो कुछ नहीं। खाता खुलवाकर बस बैंक का चक्कर लगवाया जा रहा है। दो हजार रुपये किसी तरह बचाकर रखे थे, अब उनको बदलवाने के लिए वह परेशान हैं।

   सरकार के फैसले से गरीब व किसान गुरुवार को नाराज दिखे। किसी तरह साइकिल व किराए के वाहन से वह अपनी-अपनी नोट लेकर बैंक पहुंचे थे, लंबी लाइन देखते ही उनका पारा गरम हो गया। कोई दो हजार लेकर पहुंचा था तो कोई तीन हजार। नोट बदलने की प्रक्रिया का जब उन्हें पता चली तो गुस्सा सिर चढ़कर बोलने लगा। सभी लोग सरकार को ही कोसते रहे। सबसे ज्यादा गांवों से आई महिलाएं नाराज थीं। तन्नापर के शिवनाथ ने प्रधानमंत्री जनधन योजना का लाभ लेने के लिए खाता खुलवाया था। उन्होंने बताया कि पहले वह खाता खुलवाने के लिए परेशान थे। तमाम परेशानी झेलने के बाद खाता खुलवाया, बदले में मिला कुछ नहीं।

अब घर में रखे 15 सौ रुपये को बदलवाने के लिए वह परेशान हैं। यही हाल देवखरपुर की राजरानी का रहा। राजरानी ने बताया कि कोटे से उन्हें राशन मिलता था। खाद्य सुरक्षा योजना के तहत लाभ लेने के लिए उनका खाता खुलवाया गया। अभी तक सब्सिडी खाते में नहीं आई है। अब एक और नई मुसीबत उनके सामने खड़ी हो गई। राजरानी पांच सौ के चार नोट बदलने के लिए बैंक आई थीं, लेकिन आधार कार्ड नहीं था। वोटर कार्ड बना है, जिसे वह घर में भूल गई थीं।

फार्म भरने के लिए नहीं मिल रहे थे लोग
बैंकों में रुपया जमा करना हो अथवा नोट बदलना हो। इसके लिए एक फार्म भरवाया जाता है, जिसके साथ एक पहचान पत्र देना जरूरी है। इसमें आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर कार्ड आदि शामिल है। अधिकांश बैंकों में अंग्रेजी में छपे फार्म थे। इससे गांव से आए अधिकतर लोगों को दिक्कत हुई। उन्हें यह भी नहीं पता था कि फार्म को भरना कैसे है। बैंक में भीड़ बढ़ी तो कर्मचारी भी कुछ बताने के बजाय टालमटोल करने लगे। लोगों ने पढ़े-लिखे युवाओं से मदद मांगी, लेकिन वह अपना फार्म भरकर लाइन में लगने की जल्दबाजी में रहे। इससे तमाम लोगों को वापस लौटना पड़ा।

शादी की तैयारियों को लगा बड़ा झटका
 पांच सौ व एक हजार की नोट बंद होने से सबसे ज्यादा वह लोग परेशान रहे, जिनकी बेटी व बेटे की शादी इस सहालग में है। 15 नवंबर से 10 दिसंबर तक की लगन है। जिनकी शादियां तय थीं, उन पर ऐसी मार पड़ी है कि उनको कुछ समझ में नहीं आ रहा है। मार्केट में नोट चल नहीं रही है और बैंक से रुपया भी नहीं निकल रहा है।

  दरहा निवासी अमित पटेल का 14 नवंबर को तिलकोत्सव है। सभी तैयारियां पूरी हो चुकी थी। अब उन्हें केवल सामान खरीदना था। साथ ही उन लोगों को रुपये का भुगतान करना था, जिन्हें उन्होंने आर्डर दे रखा है। नोट बंद होने का असर यह रहा कि अब उनसे कोई रुपया नहीं ले रहा है। बैंक से वह छोटी नोट लेने पहुंचे तो मायूस होकर लौटे। चार हजार से ज्यादा रुपया नहीं मिला। यही हाल कलेक्ट्रेट के वरिष्ठ लिपिक रामराज सिंह का है। उनके बेटे संदीप सिंह की 24 नवंबर को बारात जानी है और 26 नवंबर को बहूभोज है।

नोट बंद होने से वह परेशान हो गए हैं। बैंक से रुपया न निकलने के कारण वह लेनदेन नहीं कर पा रहे हैं। उनको यही नहीं सूझ रहा है कि कैसे वह खरीदारी करें। बैंकों से ज्यादा रकम मिल नहीं पा रही है। ऐसी स्थिति आ गई है कि साथियों से भी मदद नहीं ले पा रहे हैं। भदवां गांव के ज्ञान गौतम की बेटी की 24 नवंबर को भरवारी के एक गेस्ट हाउस से शादी होनी है। वह भी मारे-मारे घूम रहे हैं। उनकी सारी तैयारियां अधर में लटक गई हैं।
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