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ऑनलाइन सूचनाओं को भेजने की व्यवस्था शुरू

Tue, 24 May 2016 12:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
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क्राइम एंड क्रिमनल ट्रैकिंग नेटवर्किंग सिस्टम (सीसीटीएनएस) लगाने के मामले में इलाहाबाद जोन में कौशाम्बी मॉडल बन गया है। थानों से लेकर उच्चाधिकारियों तक क्यू मेल के जरिए ऑनलाइन सूचनाआें के आदान-प्रदान की व्यवस्था शुरू हो गई है। इस सिस्टम के लागू होने से प्रतिमाह होने वाले खर्च पर भी विराम लग गया है। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि यह व्यवस्था दोआबा में सबसे पहले लागू हुई है। अब इसे जल्द ही प्रदेश में लागू कराए जाने की कवायद की जा रही है।
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दोआबा में सीसीटीएनएस ऑनलाइन हो गया है। इससे थानों के साथ प्रदेश स्तर के अफसर साफ्टवेयर से जुड़ गए हैं। सूचनाओं को त्वरित गति देने के लिए यह प्लान लागू किया गया है। क्यू मेल के जरिए सूचनाओं के आदान-प्रदान से पुलिस महकमे में प्रतिमाह करीब एक  लाख रुपये की बचत हो रही है। अभी तक यह रकम डाक लेकर आने-जाने वाले पुलिस कर्मियों के टीए-डीए में खर्च हो जाती थी। दोआबा में क्रियान्वित हुई यह व्यवस्था आज इलाहाबाद जोन में कौशाम्बी माडल बन गया है।

अब इस व्यवस्था को पूरे प्रदेश में लागू करने की योजना को अमली-जामा पहनाने की तैयारी की जा रही है। पुलिस अधीक्षक वीके मिश्र ने बताया कि उच्चारियों के निर्देश पर क्यू मेल को आगे बढ़ाया गया है। क्यू मेल के जरिए सूचनाओं को त्वरित गति मिल सकेगी। इससे महकमे के साथ आमजन को सुविधा मिलेगी। सीसीटीएनएस प्रभारी प्रति तीस मिनट पर क्यू मेल देखेंगे।
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 कौशाम्बी के थानों और पुलिस अफसरों दफ्तर से सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए लगाए गए डाक रनर 34 पुलिस कर्मी कार्य से अवमुक्त कर दिए गए है। इसके  लिए 26 सिपाही, 4 दरोगा और 4 हेड कांस्टेबल लगाए गए थे। सीसीटीएनएस क्यू मेल लागू कराए जाने से इन सिपाहियों को तैनाती स्थल पर भेज दिया गया है।  

सूचनाओं को संकलित कर अफसरों के दफ्तर तक पहुंचाने में डाक रनर दो दिन तक का समय गवां देते थे। डाक लेकर जाने के बाद घर में फर्राटे भरते हुए रास्ते के साथ भोजन का खर्च सीधे ढील कर लेते थे। यह व्यवस्था लागू होने के बाद अब वह इस रकम से वंचित रहेंगे। बताया जा रहा है सूबे के करीब 6 हजार पुलिस कर्मी डाक रनर का काम करते है। जिसके पीछे करीब एक करोड़ रुपये व्यय किया जा रहा है।
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